अगस्त में भारत का वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा, जिससे वह चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।
सांकेतिक तस्वीर।
अगस्त में वेनेजुएला भारत का चौथा बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना।
वेनेजुएला से आयात 4.44 लाख बैरल प्रति दिन पहुंचा।
भारत ऊर्जा सुरक्षा हेतु आपूर्तिकर्ताओं में विविधता ला रहा है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगस्त में वेनेजुएला से भारत का कच्चा तेल आयात तेजी से बढ़ा है और इस तरह यह दक्षिण अमेरिका देश भारत का चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।
केप्लर के आंकड़ों से पता चलता है कि अगस्त में वेनेजुएला से आपूर्ति लगभग 4,44,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) तक पहुं गई और यह इराक (1,18,000 बीपीडी) और अमेरिका (1,53,000 बीपीडी) से बहुत ज्यादा है।
हालांकि, इस सबके बीच रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और अगस्त में वहां से आयात 20 लाख बैरल प्रतिदिन था। जून-जुलाई में रूसी कच्चे तेल का आयात लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था जो भारत के कुल कच्चे तेल की खपत का आधे से ज्यादा था।
रूस से आपूर्ति ने पश्चिम एशिया के पारंपरिक सप्लाई रूट में रुकावट के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम किया।शिप ट्रेकिंग डाटा कंपनी केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, ‘भारत एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है।
इसमें जहां संभव हो, घरेलू स्तर पर तेल उत्पादन बढ़ाना, विदेशों से कच्चे तेल के आपूर्तिकर्ताओं तथा परिवहन मार्गों में विविधता लाना, रणनीतिक एवं वाणिज्यिक भंडार तैयार करना और गैस, जैव ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहन तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे विकल्पों को बढ़ावा देना शामिल है।’ उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम से एक व्यापक रणनीति उभर रही है।
भारत निकट भविष्य में तेल से दूर नहीं जा रहा है बल्कि आपूर्तिकर्ताओं एवं परिवहन विकल्पों का दायरा बढ़ाकर अपनी जरूरत के कच्चे तेल की आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है।
रितोलिया ने कहा कि पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे तेल को पूरी तरह बदलना न तो व्यावहारिक है और न ही जरूरी तौर पर आर्थिक रूप से फायदेमंद है। खाड़ी देशों के उत्पादक भौगोलिक रूप से भारत के अधिक करीब हैं। इससे वेनेजुएला, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लातिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों की तुलना में यात्रा का समय और परिवहन लागत कम रहती है।