बांग्लादेश के रंगपुर में एक हिंदू परिवार के चार सदस्यों की निर्मम हत्या के मामले में खौफनाक साजिश का खुलासा हुआ है। हत्यारों ने पहचान मिटाने के लिए चेहरों को जलाया और डिजिटल सबूत नष्ट करने की भी कोशिश की।
बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या का मामला (सोशल मीडिया)
बांग्लादेश हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या मामला।
पहचान मिटाने के लिए जलाए गए थे चेहरे।
हत्यारों ने डिजिटल सबूत नष्ट करने का प्रयास किया।
डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और उन पर बढ़ते खतरे एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। इस बीच, बीते सप्ताह रंगपुर शहर में एक हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हुई निर्मम हत्या के मामले में अब एक साथ कई खौफनाक साजिश का खुलासा हुआ है।
बताया जा रहा है कि इस हत्याकांड मामले में अपराधियों ने न सिर्फ इस हत्या को अंजाम दिया, बल्कि चेहरे जलाकर और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खत्म कर सबूत मिटाने की खौफनाक साजिश भी रची। इस खुलासे के बाद एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सवालों के घेरे में है।
पुलिस और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, मारे गए सभी लोग एक ही परिवार के थे। इसमें 65 वर्षीय गणपति चक्रवर्ती सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक, गणपति की पत्नी 50 वर्षीय प्रीतिलता चक्रवर्ती, उनकी बेटी 23 वर्षीय गामी चक्रवर्ती प्रार्थी और बेटा 12 वर्षीय प्रियं चक्रवर्ती शामिल थे।
इन सभी के शव शनिवार रात करीब 11:30 बजे रंगपुर के दसपाड़ा इलाके में स्थित उनके बंद घर से बरामद किए गए। पुलिस का मानना है कि यह हत्याएं गुरुवार आधी रात से शुक्रवार सुबह के बीच की गई थीं।
गौर करने वाली बात यह है कि इस मामले में तब और सनसनी फैल गई जब पीड़ितों के परिजनों और पुलिस की ओर से चौंकाने वाले खुलासे हुए। मृतका प्रीतिलता की छोटी बहन पूजा चक्रवर्ती ने बताया कि जब रविवार शाम को उन्हें शव सौंपे गए, तो उन्होंने देखा कि चारों के चेहरे बुरी तरह जले हुए थे।
रंगपुर सीआईडी (CID) के कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक सुमित चौधरी ने बताया कि शुरुआती जांच में यह संदेह है कि हत्यारों ने या तो हत्या से पहले या बाद में पीड़ितों के चेहरों पर किसी ज्वलनशील पदार्थ का छिड़काव किया था, ताकि उनकी पहचान मिटाई जा सके और सबूतों को नष्ट किया जा सके।
इतना ही नहीं जांच में यह भी सामने आया है कि इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले संदिग्ध मुग्धा और सिद्धार्थ हत्या के तुरंत बाद भागे नहीं, बल्कि वे उसी घर के अंदर रुके रहे।
दावा किया गया है कि उन्होंने वहीं स्नान किया, फिर फ्रिज से खजूर और खीरे निकालकर खाए। कथित तौर पर ड्रग्स का सेवन भी किया। इसके बाद शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के समय, जब सड़कों पर शांति थी, वे वहां से फरार हो गए।
मिली जानकारी के अनुसार हत्यारों ने अलमारियां और दराजें खुली छोड़ दी थीं ताकि यह मामला सिर्फ लूटपाट के दौरान हुई हत्या लगे। इसके अलावा साक्ष्यों से पता चला कि आग से सोने के कंगन की शुद्धता जांचने की कोशिश की गई थी। इसके अलावा, पीड़ितों के दो मोबाइल फोन डिटर्जेंट मिले पानी में डुबो दिए गए थे ताकि डिजिटल डेटा और सबूतों को पूरी तरह नष्ट किया जा सके।
गौरतलब है कि परिवार से गुरुवार से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था और उनके सभी फोन बंद आ रहे थे। शक गहराने पर पुलिस ने घर का मुख्य गेट तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां घर के अलग-अलग हिस्सों में शव बिखरे हुए थे। मां और बेटी के शव सीढ़ियों पर, गणपति का शव छत पर और 12 साल के बेटे प्रियं का शव एक बिस्तर के नीचे से बरामद हुआ।
पुलिस, सीआईडी और डिटेक्टिव ब्रांच की संयुक्त टीमें इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। मिले सुरागों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है, जिन्होंने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उनकी निशानदेही पर लूटा गया सोने का सामान भी एक सुनसान जगह से बरामद कर लिया गया है।