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भारत में आज कल प्याज ने लोगों को रुला रखा है, महंगाई के इस मौसम में प्याज के आसमान छूते दाम लोगों की जेबें और ढीली कर रहा है. हमारे देश में सदियों से प्याज किचन की शोभा बढ़ाता रहा है, सब्जी चाहे कोई भी हो, लेकिन तड़का तो प्याज का ही लगता है. खाने वाले वेजिटेरियन हों या नॉन वेजिटेरियन प्याज के साथ कोई भेदभाव नहीं होता वो आलू के साथ भी घुल मिल जाता है और चिकन के स्वाद को और लाजवाब बना देता है.
अब जब देश भर में प्याज का मुद्दा चर्चा में है तो हमने नेट पर तलाश शुरू कर दी कि आखिर दुनिया के ऐसे कौन से देश हैं, जो प्याज खाने में हम भारतीयों से मुकाबला कर सकते हैं. नतीजा थोड़ा चौंकाने वाला निकला, हमारा मुकाबला एक ऐसे देश से है, जिसका नाम शायद आपने इस लिस्ट में कभी सोचा भी न हो. करीब 1.1 करोड़ की आबादी वाला तजाकिस्तान प्याज की खपत के मामले में दुनिया में सबसे आगे है, यानी जिस प्याज को लेकर भारत में इन दिनों महंगाई का हल्ला मचा है, उसी प्याज के लिए दुनिया के एक छोटे से देश में लोगों की दीवानगी हमसे भी ज्यादा है.
तो सवाल अब सिर्फ ये नहीं कि प्याज इतना महंगा क्यों हो गया? सवाल ये भी है कि आखिर तजाकिस्तान के लोगों की थाली में प्याज की इतनी अहमियत क्यों है और क्या प्याज के मामले में भारत वाकई दुनिया के सबसे बड़े ‘प्याज प्रेमियों’ में शामिल है.
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क्या कहते हैं आंकड़े
Helgi Library के मुताबिक, 2021 में प्रति व्यक्ति प्याज की खपत के मामले में तजाकिस्तान दुनिया में नंबर-1 था. 160 देशों की तुलना में तजाकिस्तान में प्रति व्यक्ति प्याज की खपत प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत 56.8 किलोग्राम थी, दूसरे स्थान पर नाइजर था, जहां प्रति व्यक्ति प्याज की खपत 49.5 किलोग्राम दर्ज की गई, इसके बाद कजाकिस्तान 43.0 किलोग्राम की खपत के साथ तीसरे स्थान पर था. अन्य प्रमुख देशों में अल्बानिया में प्रति व्यक्ति खपत 39.3 किलोग्राम, अल्जीरिया में 36.0 किलोग्राम, और सेनेगल में 31.1 किलोग्राम. 
भारत में भी प्याज की खपत कम नहीं
भारत की बात करें तो 2021 में प्रति व्यक्ति प्याज की खपत 16.3 किलो रही और 156 देशों की उसकी रैंकिंग में भारत 30वें स्थान पर था. यानी भारतीय भले ही प्याज के बड़े शौकीन हों, लेकिन प्रति व्यक्ति खपत में दुनिया के कई देश हमसे आगे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि तजाकिस्तान में प्रति व्यक्ति प्याज की खपत भारत से करीब 3.7 गुना ज्यादा थी. दूसरे शब्दों में कहें तो जहां भारत में एक व्यक्ति सालभर में औसतन 16.3 किलो प्याज की खपत के बराबर खाद्य आपूर्ति पा रहा था, वहीं तजाकिस्तान में यह मात्रा 60 किलो के करीब था. यानी प्याज सिर्फ भारतीय रसोई का स्टार नहीं है, खासकर मध्य एशिया के कुछ देशों में इसकी मौजूदगी खाने की संस्कृति में बेहद मजबूत है.
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तजाकिस्तान में आखिर इतना प्याज क्यों खाया जाता है?
तजाकिस्तान की खान-पान की परंपरा को देखें तो प्याज वहां सिर्फ तड़के के लिए इस्तेमाल नहीं होता है. यह कई पारंपरिक व्यंजनों का अहम हिस्सा है. खास तौर पर प्लोव, जो मध्य एशिया का बेहद लोकप्रिय भोजन है, उसमें चावल, मांस और गाजर के साथ प्याज का इस्तेमाल किया जाता है. तरह-तरह के सूप, स्टू, सॉस, ब्रेड और मीट के व्यंजन सब में प्याज का भरपूर इस्तेमाल होता है. चूंकि यहां चावल और अन्य अनाज बाहर से मंगाए जाने के कारण महंगे होते हैं, इसलिए खाने का स्वाद और मात्रा बढ़ाने के लिए लोग प्याज का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. अगर देश की आबादी के हिसाब से देखें, तो हर ताजिक नागरिक रोज़ाना औसतन एक मध्यम से बड़े आकार का प्याज चट कर जाता है.
7,000 साल पुराना ऐतिहासिक नाता
इतिहास के पन्नों को पलटें तो प्याज इंसानों की सबसे पुरानी फसलों में से एक है, जिसकी खेती कम से कम 7,000 सालों से हो रही है. माना जाता है कि इसकी शुरुआत सबसे पहले दुनिया के उसी हिस्से में हुई थी जहां आज ताजिकिस्तान बसा है. ऐसे में ताजिक लोगों का प्याज के प्रति लगाव उनकी मिट्टी और सदियों पुरानी विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है. चारों तरफ पहाड़ों से घिरे इस देश की मुश्किल जलवायु में प्याज किसानों के लिए एक बेजोड़ और मजबूत फसल साबित होता है. इसे लंबे समय तक बिना खराब हुए स्टोर किया जा सकता है और कहीं भी आसानी से लाया-ले जाया जा सकता है. यह न सिर्फ हर मौसम में उपलब्ध रहता है, बल्कि खाने का स्वाद और रंगत बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है.
ताजिकिस्तान का यह प्याज-प्रेम थमने वाला नहीं है, बल्कि हाल के सालों में यहां इसकी खेती और उत्पादन में तेजी आई है. अकेले ताजिकिस्तान के जयहुन ज़िले में सिर्फ़ दो सालों के भीतर 1,100 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर इसकी खेती बढ़ा दी गई, जिससे उत्पादन 2,22,000 टन तक पहुंच गया. यह साफ दर्शाता है कि मध्य एशियाई देश में भोजन, संस्कृति और जलवायु का यह अनोखा रिश्ता यूं ही बरकरार रहने वाला है.
दुनिया में औसतन 12.1 किलो प्याज प्रति व्यक्ति
अब अगर पूरी दुनिया की बात करें तो 2021 में प्रति व्यक्ति प्याज की औसत खपत 12.1 किलो थी. इसकी तुलना में भारत 16.3 किलो पर था, यानी भारत का आंकड़ा वैश्विक औसत से ऊपर है, लेकिन तजाकिस्तान का आंकड़ा इस औसत से करीब पांच गुना है.
प्याज की कुल खपत और प्रति व्यक्ति खपत दो अलग-अलग बातें हैं. भारत की बड़ी आबादी और प्याज के बड़े उत्पादन की वजह से देश में प्याज की कुल मांग बहुत बड़ी है, लेकिन जब सवाल यह हो कि एक व्यक्ति औसतन कितना प्याज खाता है, तो 2021 के आंकड़ों में भारत दुनिया में नंबर-1 नहीं, बल्कि 30वें स्थान पर था. तो भारत में प्याज महंगा होकर भले ही आंखों में आंसू ला रहा हो, लेकिन तजाकिस्तान में प्याज की कहानी कुछ और है. वहां प्याज सिर्फ रसोई की जरूरत नहीं, बल्कि पारंपरिक खान-पान का ऐसा हिस्सा है जो प्लोव से लेकर सलाद और कुरुतोब तक, थाली के कई हिस्सों में दिखाई देता है.
और शायद यही वजह है कि दुनिया में प्याज खाने वाले देशों की बात होती है तो भारत का नाम जरूर आता है, लेकिन ताज तजाकिस्तान के सिर पर है.
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