मुख्य बातें
E20 पेट्रोल को लेकर जब लोगों में इतना गुस्सा है तो केंद्र सरकार भी अब इस बात पर विचार कर रही है कि क्या XP95, Speed और Power95 जैसे ब्रांडेड फ्यूल को E10 फॉर्मूलेशन में बेचा जा सकता है। इससे अलग से E10 स्टोरेज और डिस्पेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि बहुत सारे लोग स्टैंडर्ड E20 फ्यूल से परेशान होकर हाई-ऑक्टेन वाले पेट्रोल की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।
बता दें E20 पेट्रोल में एथेनॉल 20 और E10 में 10 प्रतिशत होता है। भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम 2001 में पायलट के तौर पर शुरू हुआ था; E5 2006 में लाया गया, और हालांकि 2013-14 में ब्लेंडिंग महज 1.53% थी, तब से इसमें लगातार बढ़ोतरी हुई है।
हमारे सहयोगी मिंट को सूत्रों से पता चला है कि पेट्रोलियम मंत्रालय इस मामले पर सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम से बातचीत कर रहा है। बातचीत अभी शुरुआती दौर में है और अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
सरकार चाहे कितना भी भरोसा दिला ले, लेकिन लोग पुरानी गाड़ियों के इंजन और माइलेज पर E20 पेट्रोल के बुरे असर को लेकर चिंता जता रहे हैं। अभी कुशीनगर के एक चाय की दुकान पर इसी बात को लेकर बहस छिड़ी हुई थी। व्यवसायी गोविंद कसौधन की शिकायत है कि उनकी बाइक अब पहले से अधिक पेट्रोल खा रही है। कपड़ा व्यवसायी रस्तोगी कहते हैं कि उनकी कार अब बार-बार सर्विस मांग रही है।लोगों की इन्हीं चिंताओं के बीच पिछले कुछ महीनों से E10 पेट्रोल वापस लाने की मांग भी तेज हो गई है, क्योंकि पुरानी गाड़ियों के लिए यह ज्यादा सही माना जाता है।
एक सूत्र ने कहा, “पुरानी गाड़ियों के लिए सही E10 फ्यूल देने और लोगों की चिंता दूर करने के लिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। ऑक्टेन 95, जो प्रीमियम पर आता है, उसे E10 के रूप में देने का विकल्प भी विचार में है।”
दूसरे सूत्र ने बताया कि सरकार और तेल कंपनियां यह भी देख रही हैं कि ऑक्टेन 95 को E10 के रूप में बेचना व्यावहारिक होगा या नहीं और लोग इसे स्वीकार करेंगे या नहीं। यह एक प्रीमियम E10 होगा।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के हालिया बयान का जवाब देते हुए सिंह ने कहा, “जो ऑक्टेन 95 का मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसमें अभी 20% एथेनॉल है, उसी का इस्तेमाल करके E10 पेट्रोल आसानी से बेचा जा सकता है।”
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में बताया कि E20 पेट्रोल से गाड़ी के हिसाब से फ्यूल इकोनॉमी 2 से 6 प्रतिशत तक घट सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि डायनेमोमीटर पर इंजन टिकाऊपन के टेस्ट और सड़क पर गाड़ियों के टेस्ट में E20 की वजह से कोई खराबी नहीं मिली है।
लोकसभा में एक लिखित जवाब में गडकरी ने कहा कि E20 फ्यूल से बेहतर एक्सेलरेशन मिलता है, राइड क्वालिटी अच्छी होती है और E10 के मुकाबले कार्बन उत्सर्जन लगभग 30 प्रतिशत कम होता है।
ऑक्टेन 95 यानी ‘ब्रांडेड’ पेट्रोल जैसे इंडियन ऑयल का XP95, BPCL का SPEED और HPCL का Power95, दिल्ली में आम पेट्रोल के 102 रुपये प्रति लीटर के मुकाबले 110-115 रुपये प्रति लीटर मिलता है।
लग्जरी गाड़ियों के लिए प्रीमियम ऑक्टेन 100 वेरिएंट भी है, जिसकी कीमत 150-170 रुपये प्रति लीटर के आसपास है। इसमें इथेनॉल बिल्कुल नहीं होता और एडिटिव्स की मात्रा ज्यादा होती है।
फिलहाल ऑक्टेन 95 में भी आम पेट्रोल की तरह ही E20 ब्लेंड होता है, लेकिन इसमें खास केमिकल एडिटिव्स होते हैं, जो इंजन के पुर्जे साफ करते हैं, कंबस्शन बेहतर बनाते हैं, जंग रोकते हैं और परफॉर्मेंस सुधारते हैं। यह 90,000 सरकारी पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है।
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में ‘लाइव हिन्दुस्तान’ की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए ‘कुछ अलग’ और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
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