उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में जंगली जानवर के हमले में 60 वर्षीय किसान की मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई. वहीं, किसान की मौत से नाराज ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया और मृतक के परिवार को मुआवजा देने के साथ ही गांव के लोगों की जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की.
केले की रखवाली के दौरान किया हमला
एक एजेंसी के मुताबिक पुलिस ने बताया कि शांतिनगर गांव निवासी मुंशी प्रसाद मंगलवार रात करीब 8 बजे अपने केले के खेत की रखवाली करने गए थे. इसी दौरान खेत में घात लगाकर बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया. बाघ के हमले में किसान गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
जब काफी देर तक मुंशी प्रसाद घर वापस नहीं लौटे तो परिजनों को चिंता हुई. इसके बाद परिवार के लोग ग्रामीणों के साथ उन्हें तलाशने के लिए खेत की ओर गए. वहां किसान का खून से लथपथ शव मिला. शव देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और ग्रामीणों में भी आक्रोश फैल गया.
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बाघ और तेंदुए की गतिविधियां देखी जा रही हैं. उनका आरोप है कि इस संबंध में कई बार वन विभाग को सूचना दी गई, लेकिन जंगली जानवरों की निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए. ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने में हुई देरी पर भी नाराजगी जताई.
घटना से ग्रामीणों में आक्रोश
किसान की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने शव को रामनगर तिराहे पर रखकर सड़क जाम कर दी. उन्होंने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने और इलाके में गश्त बढ़ाने की मांग की. सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाकर सड़क खाली कराई.
पूरनपुर के सर्कल ऑफिसर विधि भूषण मौर्य ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है. वन विभाग की टीम भी मामले की जांच कर रही है. घटना के बाद ग्रामीणों में बाघ को लेकर भय का माहौल है और वे खेतों में जाने से भी डर रहे हैं.