अगला उपछाया चंद्र ग्रहण 20-21 फरवरी 2027 को लगेगा। यह ग्रहण लगभग 4 घंटे तक चलेगा और 21 फरवरी की सुबह खत्म होगा।
क्या भारत से दिखाई देगा अलग चंद्र गहण? (Picture Courtesy: Freepik)
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप एस्ट्रोनॉमी में दिलचस्पी रखते हैं, तो अपने कैलेंडर में एक खास तारीख को मार्क कर लीजिए। नासा और टाइम एंड डेट के मुताबिक अगला चंद्र ग्रहण 20 और 21 फरवरी 2027 को लगने जा रहा है, लेकिन यह मामूली ग्रहण नहीं है। यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण यानी पीन्यूमब्रल ल्यूनर एक्लिप्स होगा।
आपको बता दें कि इसके पहले 28 अगस्त को एक आंशिक चंद्र ग्रहण लगा था, जिसे अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और वेस्ट एशिया से देखा गया था, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं दिया था। आइए जानें क्या आने वाला चंद्र ग्रहण भारत से दिखाई देगा या नहीं।
उपछाया चंद्र ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया के बाहरी किनारे से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में सीधी धूप बहुत कम रुकती है। इसलिए चंद्रमा की चमक में बहुत हल्की-सी कमी नजर आती है। पृथ्वी की गहरी छाया चांद को नहीं ढकेगी। इसलिए आंशिक या पूर्ण चंद्र ग्रहण में दिखने वाली घुमावदार आकृति भी नजर नहीं आएगी। सबसे खास बात है कि ये फरवरी के स्नो मून यानी पूर्णिमा के दिन लग रहा है।
नासा के डेटा के मुताबिक, इस उपछाया चंद्र ग्रहण की शुरुआत 20 फरवरी 2027 को रात 21:12 UTC यानी भारत में 21 फरवरी की सुबह 2:45 पर इसकी शुरुआत होगी। यह ग्रहण सुबह 4:42 से 4:43 के बीच अपने पीक पर पहुंचेगा और 21 फरवरी को सुबह 6:43 पर समाप्त होगा। ये पूरा ग्रहण 240 मिनट और 59 सेकंड तक चलेगा और इसका सरोस साइकिल 143 है।
द स्काई लाइव के मुताबिक, नई दिल्ली समेत पूरे भारत में इस चंद्र ग्रहण को शुरुआत से लेकर अंत तक देखा जा सकेगा, क्योंकि भारत में इसकी शुरुआत 21 फरवरी को 2:45 पर होगी। हालांकि, इसे देखते समय एक बात का ध्यान रखना जरूरी है। ये एक उपछाया चंद्र ग्रहण है, इसलिए चांद की रोशनी में बहुत मामूली कमी नजर आएगी और बिना ध्यान से देखे इस ग्रहण को पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। हालांकि, हर जगह स्थानीय समय में अंतर होने के कारण यह अलग-अलग समय पर दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित होता है। इसलिए इसे देखने के लिए आपको किसी खास चश्मे या फिल्टर की जरूरत नहीं होती।