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फी फी आइलैंड (Phi Phi Island), थाईलैंड के प्रमुख द्वीप समूहों में से एक है, जो मलक्का में फुकेट और क्राबी प्रांत के तटीय क्षेत्र के बीच स्थित है. प्रशासनिक रूप से यह द्वीप समूह क्राबी प्रांत का हिस्सा है. फी फी आइलैंडमें कई छोटे-बड़े द्वीप शामिल हैं, जिनमें को फी फी डॉन और को फी फी ले प्रमुख हैं.
को फी फी डॉन इस समूह का सबसे बड़ा और सबसे अधिक आबादी वाला द्वीप है. यहां स्थायी आबादी के साथ प्रवासी कामगार भी रहते हैं. वर्ष 2018 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, द्वीप की आबादी लगभग 2,000 से 3,000 लोगों के बीच थी. फी फी डॉन में रहने वाली आबादी का बड़ा हिस्सा मुस्लिम है. द्वीप पर पहले थाई-मलय मछुआरों की बस्ती थी और बाद में यहां नारियल के बागान विकसित हुए.
को फी फी ले आकार में दूसरा प्रमुख द्वीप है. यह विशेष रूप से माया बे के लिए जाना जाता है. वर्ष 2000 में रिलीज हुई ब्रिटिश-अमेरिकी फिल्म द बीच की शूटिंग यहां के कुछ हिस्सों में हुई थी. फिल्म की रिलीज के बाद फी फी आइलैंड में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी. फिल्म की शूटिंग के दौरान द्वीप के प्राकृतिक क्षेत्र में बदलाव किए जाने को लेकर पर्यावरण संबंधी विवाद भी सामने आया था.
फी फी ले पर स्थित वाइकिंग गुफा भी क्षेत्र का एक प्रमुख स्थान है. यहां खाद्य पक्षी घोंसलों को एकत्र करने का काम लंबे समय से किया जाता रहा है. समूह के अन्य द्वीपों में बिदा नोक, बिदा नाई और को माई फाई शामिल हैं. इनमें से कुछ द्वीप मुख्य रूप से चूना पत्थर की चट्टानी संरचनाओं के रूप में दिखाई देते हैं.
फी फी आइलैंड तक पहुंचने के लिए फेरी, स्पीडबोट और लंबी पूंछ वाली नावों का इस्तेमाल किया जाता है. यहां आने वाले लोग आमतौर पर क्राबी शहर या फुकेत प्रांत के बंदरगाहों से यात्रा करते हैं.
दिसंबर 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी का फी फी आइलैंड पर गंभीर प्रभाव पड़ा था. सुनामी के कारण द्वीप की लगभग पूरी बुनियादी संरचना नष्ट हो गई थी. इसके बाद क्षेत्र में पुनर्निर्माण और पर्यटन गतिविधियों को फिर से विकसित किया गया.
फी फी आइलैंड का प्राकृतिक क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षण के अंतर्गत आता है. पर्यटन बढ़ने के साथ यहां कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया. वर्ष 1992 की शुरुआत में द्वीपों पर आने वाले पर्यटकों से पांच बाट का शुल्क लिया जाता था, जिसका इस्तेमाल कचरा साफ करने और अन्य स्थानीय सेवाओं में किया जाता था.
पर्यावरण को पुनर्जीवित करने के लिए माया बे को जून 2018 से जनवरी 2022 तक पर्यटकों के लिए बंद रखा गया था. इस अवधि में क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को प्राकृतिक रूप से सुधारने का प्रयास किया गया.
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