सोमवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी किए गए. कुछ लोगों ने आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए. जिसके बाद अब सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की 7.8% जीडीपी वृद्धि दर को लेकर उठ रहे सवालों और आलोचनाओं पर अपना स्पष्टीकरण जारी किया है.
दरअसल, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और कुछ अर्थशास्त्रियों द्वारा आंकड़ों की गणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विकास दर के आंकड़ों में कोई भी फेरबदल या मैकेनिकल बढ़ोतरी नहीं की गई है.
बेस ईयर और पुरानी जीडीपी आंकड़ों का संशोधन
सुभाष चंद्र गर्ग का आरोप था कि पिछले साल (Q1 FY26) की मौजूदा कीमतों (Nominal GDP) के अनुमान को ₹86.05 लाख करोड़ से घटाकर ₹80 लाख करोड़ कर दिया गया, ताकि चालू वर्ष की विकास दर ज्यादा दिखे. इसके जवाब में मंत्रालय ने बताया कि ₹86.05 लाख करोड़ का आंकड़ा 2011-12 आधार वर्ष (Old Series) के तहत था.
जब 2022-23 आधार वर्ष लागू किया गया, तो डेटा सोर्स और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की नई सीरीज के तहत पिछली तिमाही का बेस ₹80.32 लाख करोड़ (बाद में संशोधित होकर ₹80 लाख करोड़) हो गया. इसलिए दो अलग-अलग आधार वर्ष की श्रृंखलाओं की सीधी तुलना करना पूरी तरह से गलत है, और आलोचक इसे गलत तरीके से पेश कर रहे हैं.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नेगेटिव डिफलेटर (-1.5%) का गणित
आलोचकों ने ये भी सवाल उठाया था कि जब उत्पादन और कच्चे माल दोनों की कीमतें बढ़ी हैं, तो मैन्युफैक्चरिंग का इम्प्लिसिट जीवीए डिफलेटर (GVA Deflator) माइनस 1.5% कैसे रह गया. इसके जवाब में सरकार का कहना है कि भारत में अब डबल-डिफ्लेशन विधि (Double Deflation Method) का उपयोग होता है, जिसमें आउटपुट और कच्चे माल की कीमतों को अलग-अलग एडजस्ट किया जाता है.
जब कच्चे माल की दरें आउटपुट की कीमतों की तुलना में तेजी से बढ़ती हैं, तो रियल GVA ग्रोथ Nominal GVA से अधिक दिखती है. मंत्रालय का तर्क है कि Q1 में नॉमिनल GVA 7.7% और रीयल GVA 9.2% रहा, जिससे डिफलेटर -1.5% आया. इसका मतलब यह नहीं है कि उत्पाद सस्ते हुए हैं.
यही नहीं, मंत्रालय ने ओईसीडी (OECD) शोध का हवाला देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और कच्चे माल के झटकों के दौरान डबल डिफ्लेशन का उपयोग करने वाले देशों में नकारात्मक डिफलेटर दिखना एक स्वाभाविक आर्थिक प्रक्रिया है.
MoSPI का कहना है कि जीडीपी आंकड़ों की गणना में नए और अधिक सटीक डेटा स्रोतों, जैसे उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक को शामिल किया गया है. अतः 7.8% की विकास दर आर्थिक वास्तविकताओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत पद्धतियों पर आधारित है.
7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ को पीएम मोदी ने बताया बढ़ता भारत
बता दें, सोमवार को जीडीपी आंकड़े आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा, ‘वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन की बाधाओं के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती साबित की है.’ साथ ही उन्होंने कहा कि निराशावादियों के तमाम अनुमानों को खारिज करते हुए भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी आर्थिक स्थिरता और तेजी से बढ़ने की क्षमता का लोहा मनवाया है.
वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि वित्त वर्ष 2026–27 की पहली तिमाही में भारत ने शानदार आर्थिक प्रगति हासिल की है. वास्तविक जीडीपी (Real GDP) विकास दर 7.8% दर्ज की गई, जबकि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10.3% रही. जबकि वास्तविक जीवीए विकास दर 8.2% दर्ज की गई है, जो कि उत्पादन और सेवाओं के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन का संकेत है.
गौरतलब है कि अप्रैल-जून की ग्रोथ रेट को लेकर तमाम अर्थशास्त्रियों द्वारा 7.1-7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था. जिसे भारतीय इकोनॉमी ने पीछे छोड़ दिया है. इससे पिछले साल की समान तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.9% की रफ्तार से भागी थी.