चित्रकूट, संवाददाता। पिछले पांच दिन से धर्मनगरी चित्रकूट मंदाकिनी की लहरों में है। खतरे के निशान से करीब तीन मीटर ऊपर बह रही मंदाकिनी के जलप्रलय में जलमग्न मकानों में रहने वाले लोगों ने अपने नाते-रिश्तेदारों और नजदीकियों के यहां शरण ले रखी है। धर्मनगरी के यूपी-एमपी क्षेत्र में हर गली और सड़कों पर मंदाकिनी का पानी भरा हुआ है। प्रभावित इलाकों में लोगों को मदद की दरकार है। निचले इलाकों के मकान खाली करा दिए गए है। बाढ़ में फंसे लोगों को एसडीआरएफ, एनडीआरएफ व पीएसी की टीमें सुरक्षित निकालने में जुटी है। पतित पावनी मंदाकिनी ने पहली बार अपना रौद्र रुप दिखाया है। जलप्रलय को देख लोगों की रुह कांप रही है। बुधवार को भी धर्मनगरी चित्रकूट से लेकर मुख्यालय कर्वी के निचले इलाकों में हालात खराब रहे।
मंगलवार की रात से शुरु हुई मूसलाधार बारिश ने फिर स्थिति बिगाड़ दी। तड़के खतरे के निशान से नीचे पहुंची मंदाकिनी फिर उफान पर आई और निचले इलाकों को जलमग्न कर दिया। यूपी के रामघाट, निर्मोही अखाड़ा, टेंपो स्टैंड, सीतापुर, तरौंहा, गोबरिया, बहादुरपुर, कुशवाहा बस्ती व एमपी के नयागांव, खटिकाना, भरतघाट, पुरानी लंका, आरोग्यधाम आदि इलाकों की गलियों व मकानों में पानी भर गया। सड़कों पर फिर नावें चलने लगी। आनन-फानन यूपी-एमपी प्रशासन ने लोगों को अलर्ट करने के साथ ही राहत व बचाव कार्य शुरु किया। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पीएसी के साथ स्थानीय पुलिसबल के साथ अधिकारी निचले इलाकों में पहुंचे। लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया। इसके साथ ही मंदाकिनी की तरफ जाने वाले रास्तों में बेरिकेडिंग कर लोगों को प्रशासन ने रोक दिया। फिलहाल अभी बारिश का दौर नहीं थमा है। यूपी-एमपी इलाकों में रुक-रुककर मूसलाधार बारिश हो रही है। मंदाकिनी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा है। प्रशासन ने निचले इलाकों में निगरानी बढ़ाई है। पहाड़ी व राजापुर के तटवर्ती गांवों में लोगों को सतर्क किया गया है। गांवों में तैनात कर्मचारियों को मौके पर मौजूद रहने के निर्देश दिए गए है।
पांच साल में इस बार सर्वाधिक सावन में बरसे बदरा
चित्रकूट। जिले में पिछले साल की तुलना में इस बार सावन महीने में सर्वाधिक बारिश हुई। इस साल सावन (अगस्त) माह में औसत 354.05 मिमी के सापेक्ष करीब 1.8 गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक इस बार अगस्त में 629.92 मिमी वर्षा हुई। यह पिछले पांच वर्षों में औसत से 275.87 मिमी अधिक रही। बीते वर्षों में नजर डालें तो वर्ष 2021 में 117 मिमी, 2022 में 480.50, 2023 में 330.25, 2024 में 485.25 व पिछले 2025 में 360.25 मिमी वर्षा अगस्त माह में दर्ज की गई थी।
न्यूनतम जलस्तर- 123.500 मीटर
खतरे का निशान- 126.500 मीटर
नदी का बढ़ा जलस्तर- 129.200 मीटर
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