म्यांमार सीमा से सटे मिजोरम के रास्ते भारत में अवैध प्रवेश के आरोप में मार्च में गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया है। NIA के अनुसार, ये आरोपी पड़ोसी देश म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले में संलिप्त थे और भारत में भी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। विशेष अदालत ने NIA की याचिका को स्वीकार करते हुए एजेंसी को दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी नागरिक वैन डाइक और यूक्रेनी नागरिक कामिंस्की विक्टर से पूछताछ करने की अनुमति दे दी है।
NIA की जांच में सामने आया है कि कम से कम 14 यूक्रेनी नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए। वे गुवाहाटी के रास्ते मिजोरम पहुंचे और बिना आवश्यक परमिट के अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हुए। एजेंसी का आरोप है कि इनका उद्देश्य म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ लड़ रहे स्थानीय एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स को ड्रोन युद्ध, ड्रोन असेंबली और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग देना था।
NIA के अनुसार, केंद्र सरकार को 20 फरवरी को म्यांमार के म्यित्क्यिना हवाई अड्डे पर म्यांमार नेशनल एयरलाइंस के ATR-72-600 विमान पर हुए आत्मघाती ड्रोन हमले में अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों की संलिप्तता की पुख्ता जानकारी मिली। जब विमान में यात्री सवार हो रहे थे तभी आरपीजी वॉरहेड से लैस दो ड्रोन ने विमान के अगले हिस्से, मुख्य ढांचे और पिछले हिस्से को निशाना बनाया। जांच में संकेत मिले हैं कि इस हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन मैथ्यू वैन डाइक मॉड्यूल से जुड़े नेटवर्क द्वारा स्थानीय विद्रोहियों को मुहैया कराए गए थे।
जांच एजेंसी ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से जब्त डिजिटल उपकरणों जैसे कि लैपटॉप और फोन से कई अहम फोटो, वीडियो और वॉइस सैंपल बरामद किए हैं। NIA इन साक्ष्यों और वीडियो डेटा के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन ड्रोनों की आपूर्ति कहां से हुई और म्यांमार के विद्रोही गुटों तक यह तकनीक कैसे पहुंची।
NIA का यह भी दावा है कि जिन म्यांमार आधारित सशस्त्र विद्रोही गुटों को ये आरोपी ट्रेनिंग और हथियार दे रहे थे, वे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों की भी मदद करते हैं। इससे भारत के रणनीतिक रूप से संवेदनशील पूर्वोत्तर क्षेत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधे तौर पर खतरा उत्पन्न होता है।
बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
आरएसएस विज्ञापन र॓टहमार॓ साथ कामकरेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT Auto HealthshotsHT SmartcastFAB Play