नौकरी पर खतरा! भारत में सैकड़ों कर्मचारियों को निकालने जा रही यह कार कंपनी, CEO ने बताई अंदर की बात – Hindustan

दिग्गज कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन अपनी भारतीय यूनिट ‘स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया’ में बड़ा फेरबदल करने की तैयारी कर रही है। कंपनी अपने तीन साल के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान में तेजी लाते हुए भारत में अपने वर्कफोर्स से लगभग 12 पर्सेंट कर्मचारियों की कटौती करने जा रही है। इसका मुख्य मकसद नए निवेश चक्र से पहले परिचालन लागत में कमी लाना है। यह पुनर्गठन साल 2025 में शुरू हुआ था। हालांकि, अब इसे 2027 तक जल्द से जल्द पूरा करने के लिए छंटनी की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। ऑटो इंडस्ट्री में इस बड़े कदम को कंपनी की भविष्य की रणनीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस रीस्ट्रक्चरिंग प्रोसेस के तहत कंपनी में काम करने वाले कई सौ ऑफिस और फैक्ट्री कर्मचारियों की नौकरियां खत्म होने की उम्मीद है। फॉक्सवैगन भारत में अपनी अगली पीढ़ी की नई गाड़ियों और एक नए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) मॉडल को पेश करने की तैयारी में है। इससे पहले कंपनी भारतीय परिचालन से करोड़ों डॉलर की बचत करना चाहती है। दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऑटो बाजारों में से एक होने के बावजूद भारत में फॉक्सवैगन अब तक बड़ा पैमाना हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही है।

इस बड़े फैसले पर स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ पीयूष अरोड़ा ने कहा कि वे कर्मचारियों की संख्या के आंकड़ों पर टिप्पणी नहीं करेंगे। लेकिन भारत में परिचालन को बेहतर बनाने के प्रयास तेजी से जारी हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में कंपनी अपनी लोकल इंजीनियरिंग टीम का विस्तार करेगी और भारत को मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और एक्सपोर्ट के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निवेश बढ़ाएगी।

भारत में नौकरियों में की जा रही यह कटौती फॉक्सवैगन के ग्लोबल स्तर पर चल रहे पुनर्गठन से अलग है। हालांकि, ग्लोबल लेवल पर भी फॉक्सवैगन के सीईओ ओलिवर ब्लूमे 50,000 अतिरिक्त नौकरियां खत्म करने और 2035 तक अपने गाड़ी मॉडलों की कतार को आधा करने की योजना पर काम कर रहे हैं। भारत में कंपनी अपनी लागत ऐसे समय में कम कर रही है जब वह सज्जन जिंदल के JSW ग्रुप के साथ एक बड़ी डील के करीब पहुंच रही है।

भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में दो दशकों से अधिक समय बिताने के बाद भी मारुति सुजुकी, हुंडई, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों के दबदबे के कारण फॉक्सवैगन की उपस्थिति काफी सीमित रही है। इसके अलावा, वैश्विक ऑटो उद्योग में ईवी पर भारी खर्च और चीनी कंपनियों से मिल रही कड़ी चुनौती ने फॉक्सवैगन पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में कंपनी भारत में अपने मुख्यालय पर निर्भरता कम करते हुए अपने घरेलू बिजनेस को अधिक आत्मनिर्भर और किफायती बनाना चाहती है ताकि भविष्य की चुनौतियों से आसानी से निपटा जा सके।

देश-दुनिया की खबरों में रुचि पत्रकारिता में खींच लाई। IIMC, नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत 2022 में ‘लाइव हिंदुस्तान’ से हुई। बीते करीब 4 सालों से आशुतोष बिजनेस और ऑटो सेक्शन में काम कर रहे हैं। राजनीति, बिजनेस और धर्म में खास रुचि है। लाइव हिंदुस्तान में बिजनेस, टेक, ऑटो, स्पोर्ट्स, एस्ट्रोलॉजी, करियर और न्यूज सेक्शन में लगातार काम करने का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान के लिए बिहार चुनाव 2025 का ग्राउंड पर जाकर पूरा वीडियो कवरेज किया है। बड़े नेताओं और लेखकों के साथ 50 से ज्यादा इंटरव्यू लेने का अनुभव भी रखते हैं। आशुतोष को उनकी रिपोर्टिंग के लिए संस्थान की ओर से प्रतिष्ठित ‘Digi journo of the Quarter’ अवार्ड भी मिल चुका है।
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