नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आए भीषण हिमस्खलन और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचाई है, जिससे त्रिशूली नदी ने अपना बहाव क्षेत्र पूरी तरह बदल लिया है।
त्रिशूली नदी का विकराल रूप।
डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आए भीषण हिमस्खलन और मलबे के सैलाब ने भयानक तबाही मचाई है। चंद घंटों में हरे-भरे पहाड़ी इलाके मलबे और कीचड़ के विशाल मैदान में बदल गए, जिसके जख्म आज दसवें दिन बाद भी उतने ही गहरे हैं।
ऐसे में अब सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने इस प्रलय का एक और खौफनाक सच उजागर किया है। पूरी बात को ऐसे समझिए कि आपदा का मलबा ढोने वाली त्रिशूली नदी ने अपना विकराल रूप दिखाते हुए बहाव क्षेत्र पूरी तरह बदल लिया है और नदियां अपनी सामान्य चौड़ाई से कई गुना फैलकर तबाही के नए निशान छोड़ गई हैं।
नेपाल सेना के मुताबिक, तिब्बत सीमा से करीब 125 किलोमीटर दूर रासुवा जिले के टिमुरे और स्याब्रूबेसी इलाकों में पानी का स्तर अचानक बढ़ने से भारी तबाही हुई। जैसा कि पहले भी बताया गया है कि इस पूरे आपदा में जिस त्रिशूली नदी ने इस विनाशकारी मलबे को ढोया, उसने अपना बहाव क्षेत्र पूरी तरह बदल दिया है और नदियां अपनी सामान्य चौड़ाई से कई गुना फैल गई हैं।-1788527690912.webp)
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि बाढ़ के बाद नदियां किस तरह विकराल रूप ले चुकी हैं।
चमत्कारिक बचाव और नुकसान के आंकड़े
गौरतलब है कि नेपाल में राहत और बचाव अभियान का आज दसवां दिन है। इस बीच, त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर फंसे दो मजदूरों को आज सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिसे विशेषज्ञ किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।
इस भीषण आपदा से नेपाल में अब तक 1200 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5083 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं बात अब चीन की करें तो सरकारी मीडिया के अनुसार, 21 लोगों की मौत हुई है और 541 लोग लापता हैं।
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