विझिंजम बंदरगाह बनेगा भारत के वैश्विक समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र – Hindustan

रांची/तिरुवनंतपुरम। भारत के समुद्री व्यापार को वैश्विक स्तर पर मजबूती देने की दिशा में विकसित किए जा रहे विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का शुक्रवार को झारखंड के पत्रकारों के एक दल ने दौरा किया। पत्र सूचना कार्यालय रांची द्वारा पीबाईबी तिरुवनंतपुरम के समन्वय से आयोजित ‘केरल प्रेस यात्रा’ के तहत पत्रकारों को बंदरगाह के निर्माण, संचालन, आधारभूत संरचना और भविष्य की विस्तार योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। अंतरराष्ट्रीय पूर्व-पश्चिम समुद्री व्यापार मार्ग के बेहद निकट स्थित यह बंदरगाह आधुनिक गहरे समुद्री कंटेनर पारगमन (ट्रांसशिपमेंट) केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्राकृतिक गहराई और रणनीतिक स्थिति के कारण यह भारत के समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।

प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया गया कि विझिंजम का मुख्य उद्देश्य भारत के आयात-निर्यात से जुड़े कंटेनर व्यापार को देश के भीतर ही संभालना है। वर्तमान में भारतीय कार्गो के एक बड़े हिस्से को अन्य देशों के बंदरगाहों के जरिए भेजना पड़ता है। विझिंजम के शुरू होने से बड़े कंटेनर जहाजों की सीधी आवाजाही संभव होगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी और भारत वैश्विक समुद्री केंद्र के रूप में उभरेगा।

पत्रकारों ने दौरे के दौरान बंदरगाह के विभिन्न परिचालन क्षेत्रों का भ्रमण कर बड़े कंटेनर जहाजों के संचालन, कंटेनरों की आवाजाही व भंडारण सहित अन्य गतिविधियां प्रत्यक्ष रूप से देखीं। प्रतिनिधिमंडल को आधुनिक कंटेनर प्रबंधन प्रणालियों, तकनीक और स्वचालन के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों व विशेषज्ञों ने बताया कि ये उन्नत तकनीकें बंदरगाह संचालन को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाती हैं।

प्रतिनिधिमंडल को विझिंजम बंदरगाह के निर्माण और विकास की पूरी यात्रा के बारे में बताया गया। परियोजना के विकास के विभिन्न चरणों, आधारभूत संरचना के निर्माण, तकनीकी विशेषताओं और वर्तमान संचालन व्यवस्था के बारे में अधिकारियों ने विस्तार से बताया। इसके साथ ही बंदरगाह के भविष्य के विस्तार की योजनाओं और आनेवाले समय में इसकी क्षमता बढ़ाने की संभावनाओं से भी पत्रकारों को अवगत कराया गया। प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर बंदरगाह के संचालन तथा भारतीय समुद्री अर्थव्यवस्था में इसकी संभावित भूमिका को समझा।

विझिंजम बंदरगाह को केवल समुद्री परिवहन और कंटेनर पारगमन के दृष्टिकोण से ही महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव भी हो सकते हैं। बंदरगाह के विस्तार और संचालन से समुद्री व्यापार, परिवहन, माल ढुलाई, भंडारण, रसद, रोजगार और इससे जुड़ी अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। बंदरगाह के विकसित होने से भारत की वैश्विक समुद्री व्यापार व्यवस्था में हिस्सेदारी बढ़ाने और देश की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही भारत के आयात-निर्यात माल के लिए देश के भीतर ही बेहतर पारगमन सुविधा विकसित होने से समय और लागत को कम करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

इस यात्रा का उद्देश्य झारखंड के पत्रकारों को केरलम में संचालित विभिन्न विकास परियोजनाओं, संस्थानों और पहलों की जमीनी जानकारी उपलब्ध कराना और उनके व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को समझाना है। दौरे के दौरान पत्रकारों ने आधुनिक बंदरगाह के संचालन और तकनीकी व्यवस्था को करीब से देखा और यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, आधुनिक आधारभूत संरचना, तकनीक और स्वचालन के समन्वय से भारत की समुद्री व्यापार क्षमता को नई दिशा दी जा सकती है।

संक्षिप्त परिचय: श्रेयसी मिश्रा पिछले 19 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान, रांची संस्करण में विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। वह उच्च शिक्षा, महिला, बाल विकास और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर गहन रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।
परिचय एवं अनुभव
श्रेयसी मिश्रा मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। वर्ष 2011 से हिन्दुस्तान, रांची संस्करण से जुड़ी श्रेयसी ने उच्च शिक्षा, नवाचार, शोध, अनुसंधान और नीति-आधारित विषयों की रिपोर्टिंग में विशेष दक्षता हासिल की है। बदलते शैक्षणिक रुझानों और पाठकों की रुचि को समझने की उनकी क्षमता उनकी रिपोर्टिंग को विशिष्ट बनाती है।
करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल तक)
श्रेयसी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान, रांची से की। इससे पूर्व उन्होंने आकाशवाणी पटना, आकाशवाणी रांची, दूरदर्शन केंद्र पटना और दूरदर्शन केंद्र रांची में कार्य किया, जहां उन्होंने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल पत्रकारिता की मजबूत नींव तैयार की। इन्होंने कला, संस्कृति और फिल्म जगत की रिपोर्टिंग में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। श्रेयसी ने गायक शान, मीका सिंह, कैलाश खेर, शारदा सिन्हा, पलाश सेन, ममता शर्मा, मालिनी अवस्थी, मनोज तिवारी, संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा, सितार वादक उस्ताद अमजद अली खान सहित अनेक ख्यातिप्राप्त कलाकारों और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, ओलंपियन मैरी कॉम जैसी विशिष्ट हस्तियों के साक्षात्कार किए हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
श्रेयसी मिश्रा ने इतिहास में स्नातकोत्तर (एमए) की उपाधि प्राप्त की है और फैशन डिजाइनिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। सक्रिय पत्रकारिता में आने से पूर्व उनकी कहानियां और आलेख संडे ऑब्ज़र्वर, नवभारत टाइम्स और हिन्दुस्तान जैसे राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। संडे ऑब्जर्वर में उनका बिहार की तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का साक्षात्कार काफी चर्चित रहा था। इन्होंने सीबीएसई शिक्षा प्रणाली, एनईपी-2020, आधुनिक खेती के तरीके, नई फसलों क प्रभेद और ग्रामीण आजीविका से जुड़े विषयों पर भी कई एक्सक्लूसिव और प्रभावशाली स्टोरीज़ की हैं।
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