पुरानीराष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पीजी हॉस्टल के जमींदोज होने के बाद एक बार फिर से उस IAS अफसर की चर्चा राजधानी में होने लगी है, जिनका 2022 में तबादला कर दिया गया था। तब उन पर आरोप लगे थे कि वह अपनी रसूख का इस्तेमाल कर दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में एथलीटों को जल्दी जाने के लिए कहवाते थे, ताकि वो स्टेडियम में अपने कुत्ते को घुमा सकें। दरअसल, संजीव खिरवार, उस समय दिल्ली के प्रधान सचिव (राजस्व) हुआ करते थे। हालांकि, तब उन्होंने आरोपों को पूरी तरह गलत बताया था लेकिन ये माना था कि वे ‘कभी-कभी’ अपने पालतू जानवर को उस जगह पर टहलाने ले जाते थे, लेकिन इस बात से इनकार किया कि इससे एथलीटों की प्रैक्टिस में कोई बाधा आती थी।
चार साल बाद, वही खिरवार दिल्ली के एक और विवाद के केंद्र में हैं। इस बार लोगों की जान गई है। दरअसल, इस बार खिरवार उस MCD की वजह से चर्चा में हैं, जिसकी लापरवाही से ये हादसा हुआ है। खिरवार को इसी साल जनवरी में दिल्ली नगर निगम (MCD) का कमिश्नर नियुक्त किया गया था, जिससे स्टेडियम में ‘कुत्ते को घुमाने’ वाला विवाद पीछे छूट गया था और उनकी राष्ट्रीय राजधानी में वापसी हुई थी लेकिन सत्य निकेतन इलाके में दशकों पुरानी पांच मंजिला इमारत के ढहने वाले हादसे ने उन्हें फिर से लाइम लाइट में ला दिया है।
‘हॉस्टल डेज़’ नाम की इस इमारत में लड़कों का PG चलता था। रविवार को मरम्मत के काम के दौरान यह इमारत ढह गई। सत्य निकेतन इलाके में सैकड़ों छात्र भीड़-भाड़ वाली जगहों पर रहते हैं। इस हादसे को MCD की लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तरफ खिरवार ने इस हादसे पर सफाई देते हुए कहा, “अगस्त में हमने उसी इलाके में 3-4 इमारतों को गिराने के आदेश पारित किए थे। नियमित रूप से पहचान की प्रक्रिया की जाती है। पिछले तीन महीनों में, 960 इमारतों को गिराया गया, 407 इमारतों को सील किया गया, और 1,500 इमारतों को सील करने और गिराने के लिए नोटिस जारी किए गए। यह अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने की एक नियमित प्रक्रिया है।”
इस घटना की वजह से लोगों में भारी गुस्सा भी है। लिहाजा, इस त्रासदी के एक दिन बाद सोमवार को दिल्ली नगर निगम ने तत्काल प्रभाव से पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंड किए गए अधिकारियों में राकेश कुमार, डिप्टी कमिश्नर (साउथ ज़ोन); सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह; एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल; असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग) सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग) आशीष कुमार शामिल हैं। ये सभी साउथ जोन के अफसर हैं।
बिल्डिंग गिरने के बाद, स्थानीय लोगों ने लगातार जल-जमाव की समस्या, बिना रोक-टोक चल रहे निर्माण कार्य और इलाके में बिल्डिंग मालिकों व सिविक एजेंसियों की “लापरवाही” की भी शिकायत की है, जो साफतौर पर MCD की लापरवाही को उजागर करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण जल-जमाव की समस्या और बढ़ गई थी और बिल्डिंग के बेसमेंट में मरम्मत और निर्माण का काम चल रहा था, जबकि बचावकर्मी मलबे में फंसे छात्रों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे।
एक स्थानीय निवासी ने समाचार एजेंसी PTI को बताया, “नए एकेडमिक सेशन में वे सिर्फ़ बिल्डिंग को दोबारा पेंट करते हैं, तो हमें कैसे पता चलेगा कि कोई बिल्डिंग जर्जर हालत में है? MCD कोई इंस्पेक्शन नहीं करती है।” एक चश्मदीद ने कहा कि अगर यह घटना किसी कामकाजी दिन हुई होती तो स्थिति और भी खराब हो सकती थी, क्योंकि आस-पास के इलाकों के कई छात्र वीकेंड के लिए घर लौट गए थे।
प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन’ रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन’ है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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