हजारीबाग, शिक्षा प्रतिनिधि। विभावि पीजी इतिहास विभाग की ओर से विवेकानंद सभागार में भारतीय ज्ञान परंपरा का विऔपनिवेशीकरण इतिहासलेखन और अतीत से लेकर वर्तमान तक ज्ञान के निर्माण में इसका योगदान विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें पहले झारखंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन पर मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उसके बाद सत्र प्रारंभ हुआ। कुल दो सत्र संचालित हुआ । प्रथम सत्र में पैनल डिस्कशन और इंटरएक्टिव सेशन तथा द्वितीय सत्र में शोधपत्र प्रस्तुतीकरण हुई।
मौके पर प्रोफेसर श्याम नारायण लाल ने कहा कि वर्तमान के वैज्ञानिक अनुसंधान आधुनिक समाज व संस्कृति के धर्मनिरपेक्ष बौद्धिक जगत को भी आलोकित करता है । भारतीय ज्ञान परंपरा निश्चित रूप से गतिमान है, प्रासंगिक है और उसमें केवल वेद, पुराण, धर्म सूत्र, धर्म शास्त्र स्मृति उपनिषद भारतीय दर्शन की इच्छा प्रमुख शाखाएं जैसे ग्रंथ केवल धर्म विशेष को संबोधित नहीं करते बल्कि भारत की अखंडता एवं एकता को भी प्रशस्त करते हैं ।
प्रोफेसर प्रीतीश आचार्य ने उड़ीसा की दो ऐसी महिलाओं का हवाला देते हुए बतलाया कि भारत के अन्य प्रदेशों की तरह इन अनपढ़ किंतु राष्ट्रवाद ओतप्रोत हजारों महिलाएं ने गांधीजी के अहिंसा और सत्याग्रह के आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने सिद्ध करने का प्रयास किया की भारत की ज्ञान परंपरा में न केवल शिक्षित लोगों को शिक्षित किया बल्कि अशिक्षित दलित एवं वंचित वर्गों में परंपरा के रूप में विवेक और संस्कार को पल्लवित पोषित किया।
प्रोफेसर सलिल मिश्रा का मानना था कि भारतीय ज्ञान परंपरा को संशोधित और परिवर्तित भी किया जा सकता है, यदि इसके लिए ठोस तर्क और शोध उपलब्ध हो। यह हमारे बौद्धिक विकास की सतत प्रक्रिया का अभिन्न अंग है। कुलपति प्रोफेसर चंद्रभूषण शर्मा पैनल डिस्कशन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि इतिहास सभी विषयों और विधाओं का केंद्र है। जब भी भारतवर्ष में या कहीं भी कोई बौद्धिक विवाद विकसित होता है तो वह अनिवार्य रूप से इतिहास के इर्द-गिर्द ही घूमेगी।
यह पैनल डिस्कशन और इंटरएक्टिव सेशन में संत कोलंबा महाविद्यालय, मार्खम कॉलेज ऑफ कॉमर्स और केबी महिला महाविद्यालय, के छात्रो ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त आदर्श कॉलेज राजधनवार, चतरा कॉलेज चतरा, रामगढ़ कॉलेज रामगढ़, जेजे कॉलेज तिलैया और दिल्ली यूनिवर्सिटी तथा अमेटी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉएडा के छात्र-छात्राओं ने इंटरनेट के माध्यम से जुड़कर पीठासीन मंच के विद्वानों से अपने जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का उत्तर जाना। महत्वपूर्ण बात यह है कि कुलपति स्वयं राष्ट्रीय स्तर पर नवीन शिक्षा नीति 2020 के निर्माण एवं क्रियान्वयन में हिस्सा रहे हैं। मंच पर आसीन विद्वानों में प्रोफेसर सलिल मिश्रा, अंबेडकर विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, प्रोफेसर श्याम नारायण लाल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जम्मू में समप्रीति मीडिया एवं संचार शाखा के अध्यक्ष, प्रोफेसर प्रीतिश आचार्य, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद एनसीआरटी के वरिष्ठ प्राध्यापक और डॉक्टर अमित कुमार सुमन, किरोड़ीमल कॉलेज, नई दिल्ली के इतिहास विभाग के प्राध्यापक शामिल थे। संगोष्ठी का संचालन इतिहास विभाग, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ हितेंद्र अनुपम ने किया।
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