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सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाने का विकल्प फिलहाल खुला रखा है. संसद के मॉनसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया था. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही थीं कि सरकार विशेष सत्र बुला सकती है लेकिन अब तक सरकार की तरफ से विशेष सत्र को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है.
सूत्रों की मानें तो सरकार BRICS समिट के बाद विशेष सत्र को लेकर फैसला कर सकती है. BRICS के बाद सरकार यह तय करेगी कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया जाए या नहीं. अगर सरकार तय करती है कि विशेष सत्र नहीं बुलाना है तो मॉनसून सत्र का सत्रावसान कर दिया जाएगा लेकिन अगर सरकार विशेष सत्र बुलाने का फैसला करती है तो नवरात्रि के दौरान सत्र बुलाया जा सकता है.
जयराम रमेश ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने X पर पोस्ट करते हुए इस पर सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि मॉनसून सत्र को खत्म हुए 29 दिन हो चुके हैं लेकिन सत्रावसान नहीं किया गया.
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उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रही है. उन्होंने इसे बेवकूफी बताते हुए कहा है कि सरकार सोच रही है कि इससे विपक्ष घबरा जाएगा लेकिन असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है.
तो आज मोदी सरकार ने 2015 में बनाए अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है।
संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और उसके सत्रावसान के बीच का अंतर 29 दिन हो गया है। 2015 के मानसून सत्र में यह अंतर 28 दिनों का था। 2026 के मानसून सत्र में यह अंतर हर दिन…
संसद के मॉनसून सत्र में दोनों सदनों के कामकाज हंगामे के चलते भेंट चढ़ गया. संसद में अगर रोज़ाना छह घंटे की संसदीय कार्यवाही मानी जाए, तो 15 दिनों में 90 घंटे का काम होना चाहिए था. हालांकि, लोकसभा में इस सत्र में केवल 15 घंटे 36 मिनट ही काम हो सका है जबकि राज्यसभा में 15 दिनों में 24 घंटे 21 मिनट काम हुआ, जिसमें हर बिल को पास करने में औसतन लगभग एक घंटा लगा. इसके बाद से ही विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी.
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