दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के अनुसार, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के जरिए भारत के पास अपनी वैश्विक नेतृत्व क्षमता को फिर से मजबूत करने का एक बेहतरीन मौका है. मौजूदा समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काफी उथल-पुथल मची हुई है, जिससे विकासशील देशों के सामने एक नए और वैकल्पिक मंच की जरूरत महसूस हो रही है. हालांकि, कुगेलमैन का मानना है कि इस विस्तारित समूह में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया के तनाव और कुछ सदस्यों के अमेरिका-विरोधी रुख के बीच संतुलन बनाते हुए सभी को एक आम सहमति पर राजी करना और एक ठोस संयुक्त बयान जारी करवाना होगी.
आइए जानते हैं कि भारत किन 10 प्रमुख मोर्चों पर ग्लोबल साउथ की सशक्त आवाज़ बनकर उभर रहा है:
वैश्विक अस्थिरता के दौर में विश्वसनीय समाधान पेश करना
वैश्विक अस्थिरता के दौर में विश्वसनीय समाधान भारत लगातार पेश कर रहा है. आज अनिश्चितता के इस दौर में जब वैश्विक संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं, भारत विकासशील देशों को ठोस और व्यावहारिक समाधान प्रदान कर रहा है. महामारी और आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा कई देशों को वैक्सीन, खाद्यान्न और आपातकालीन चिकित्सा सहायता (वैक्सीन मैत्री) पहुंचाई गई थी. आज भारत मध्य पूर्व से लेकर दुनिया के अन्य हिस्सों में जारी तनाव को मध्यस्थता से कम कर सकता है क्योंकि उसके सभी पक्षों के साथ कूटनीतिक संबंध हैं.
विदेश नीति की प्राथमिकता
विदेश नीति की प्राथमिकताओं को शीर्ष पर रखना भारत ने अपनी कूटनीति के केंद्र में रखा है. हमेशा विकासशील देशों के विकास, प्राथमिकताओं और आकांक्षाओं को सबसे ऊपर रखा है. भारत ने अपनी जी-20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी यूनियन (AU) को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल कराने में मुख्य भूमिका निभाई, जिससे ग्लोबल साउथ को वैश्विक मंच पर सीधा प्रतिनिधित्व मिला. एक बार फिर भारत सभी को साथ लेकर चलने को तैयार है.
दूरियों को पाटना और आम सहमति बनाना
अलग-अलग और विरोधी रुख वाले देशों के समूह में आम सहमति बनाना भारत की कूटनीतिक विशेषज्ञता को दर्शाता है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव जैसे गंभीर मुद्दों पर बंटे हुए देशों के बीच ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ या साझा बयानों पर सर्वसम्मति कायम करना एक बड़ी उपलब्धि होगी.
एक गुट का पक्ष नहीं लेना
जटिल भू-राजनीतिक (Geopolitical) स्थितियों को संभालने के लिए किसी एक गुट का पक्ष लेने के बजाय, भारत सभी विरोधी पक्षों के साथ संतुलन बिठाते हुए स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है. एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ घनिष्ठ रणनीतिक और रक्षा संबंध (जैसे क्वाड) रखना, और साथ ही ब्रिक्स मंच पर रूस व अन्य देशों के साथ ऊर्जा और व्यापारिक सहयोग बनाए रखना, एक बेहतरीन रणनीति है.
मजबूत और सुरक्षित आर्थिक गलियारे का निर्माण
ग्लोबल सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर करने के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक ट्रेड कॉरिडोर तैयार करने में भारत की भूमिका सराहनीय है. भारत मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) जैसी पहलों के जरिए व्यापारिक रास्तों को मजबूत करना और निर्भरता के जोखिम को कम करना चाहता है
विकासशील देशों के आयात-निर्यात को सुचारू रखना
समुद्री रास्तों और अहम जलडमरूमध्यों को सुरक्षित रखकर विकासशील देशों के आयात-निर्यात को सुचारू रखना भारत का उद्देश्य है. हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना द्वारा ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाना और लाल सागर व होर्मुज जलडमरूमध्य के पास व्यापारिक जहाजों को समुद्री लुटेरों या हमलों से सुरक्षा प्रदान करना सराहनीय कदम हैं.
सस्टेनेबल और समावेशी इनोवेशन को बढ़ावा
भारत अपनी स्वदेशी तकनीक और डिजिटल मॉडल (जैसे इंडिया स्टैक, यूपीआई और डिजिलालॉकर) को केन्या और श्रीलंका जैसे अफ्रीकी व एशियाई देशों के साथ साझा कर रहा है. इन डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पहलों से विकासशील देशों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है और वे विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
UNSC, IMF और विश्व बैंक जैसे पुराने संस्थानों में विकासशील देशों की अनदेखी के खिलाफ मुखर होना
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), आईएमएफ और विश्व बैंक जैसे पुराने वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों की अक्सर अनदेखी की जाती है. इन संस्थानों में सुधार की मांग उठाकर और विशेषकर अफ्रीका व लैटिन अमेरिका जैसे ग्लोबल साउथ के देशों के लिए सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का पुरजोर समर्थन करके, भारत वास्तव में विकासशील दुनिया की एक मजबूत आवाज बन गया है.
टकराव के बजाय ‘रचनात्मक साझेदारी’ का संदेश
ब्रिक्स जैसे मंचों को किसी पश्चिमी-विरोधी गुट बनने से रोककर केवल रचनात्मक विकास और ‘साउथ-साउथ कोऑपरेशन’ (आपसी सहयोग) पर ध्यान देना. भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद आपसी व्यापार, स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन (लोकल करेंसी सेटलमेंट) और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के माध्यम से विकासशील देशों को बिना किसी सख्त शर्त के वित्तीय मदद उपलब्ध कराने पर जोर देना.
संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.
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