ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने वित्त मंत्री से 2000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR से पूरी छूट देने की मांग की है।
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि पेट्रोल पंपों को 2000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR से पूरी तरह छूट दी जाए।
एसोसिएशन ने बताया कि UPI पेमेंट पर लगने वाले शुल्क सीधे तौर पर डीलरों की कमाई पर असर डालते हैं, क्योंकि उनकी कमाई ट्रांजैक्शन की वैल्यू के बजाय तय मार्जिन पर आधारित होती है। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अजय बंसल ने बुधवार को वित्त मंत्री को पत्र लिखकर पेमेंट प्रोसेसिंग की लागत के मामले में दखल देने की मांग की।-1789568155165.webp)
इस लेटर में कहा गया, ‘डीलर का मार्जिन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निर्देशों के तहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) द्वारा तय किया जाता है और यह प्रति लीटर के आधार पर तय होता है, न कि ट्रांजैक्शन वैल्यू के प्रतिशत के तौर पर। इसलिए, डीलरों के पास ट्रांजैक्शन की वैल्यू के अनुपात में अपनी कमाई बढ़ाने का कोई तरीका नहीं है।’
एसोसिएशन ने बताया कि अक्टूबर 2017 के बाद से इन कमीशन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि बिजली, मजदूरी और रेगुलेटरी नियमों के पालन जैसे ऑपरेशनल खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ लगातार बातचीत के बावजूद यह मुद्दा अनसुलझा है, जिससे डीलरों की कमाई बहुत कम रह जाती है।
पत्र में आगे कहा गया है, ‘2000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का मामूली लगने वाला फिक्स्ड चार्ज भी कुल मिलाकर बहुत बड़ा असर डालेगा। पेट्रोल पंप पर हर दिन बहुत बड़ी संख्या में ट्रांजैक्शन होता हैं। पेट्रोलियम रिटेलिंग के अर्थशास्त्र के हिसाब से 0.4% तक का MDR भी काफी असर डालेगा.
एसोसिएशन का कहना है कि पेमेंट के तरीके से फ्यूल ट्रांजैक्शन नहीं बदलते हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं जब सरकार ने फ्यूल ट्रांजैक्शन की अलग प्रकृति को माना है और कार्ड पेमेंट पर छूट दी है; डीलर्स का तर्क है कि यही सिद्धांत UPI पेमेंट पर भी लागू होना चाहिए।
लेटर में चेतावनी दी गई कि ऐसे शुल्क से ऐसी स्थिति भी बन सकती है जिसमें डीलर अपनी पहले से कम कमाई को बचाने के लिए एक निश्चित सीमा से ज्यादा के UPI पेमेंट को रोकने के लिए मजबूर हो जाएं। यह डिजिटल पेमेंट, पारदर्शिता और ट्रांजैक्शन में आसानी को बढ़ावा देने के सरकार के उद्देश्य के खिलाफ होगा।’
राहत की मांग करते हुए, एसोसिएशन ने केंद्र से अनुरोध किया कि रिटेल आउटलेट्स पर सभी UPI ट्रांजैक्शन पर, चाहे रकम कितनी भी हो, MDR और उससे जुड़े ट्रांजैक्शन शुल्क से पूरी छूट दी जाए।
इसमें यह भी कहा गया है कि अगर कोई सामान्य सीमा (थ्रेशोल्ड) लागू रहती है, तो पंप के कामकाज को बनाए रखने के लिए रिटेल आउटलेट्स को ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर प्रतिशत-आधारित MDR और प्रति-ट्रांजैक्शन फिक्स्ड चार्ज, दोनों से खास राहत मिलनी चाहिए।
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