कवयित्री सुमित्रा सरल ने मैं तुमको देख कर रुकती हूं, पर ये घुंघरू नहीं रुकते, मैं कितनी बार यह दिल दूं, तेरे जादू नहीं रूकते.. की प्रस्तुति ने जमकर तालियां बटोरी। मौका था हिंदू उत्सव समिति व दोस्ती ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित कवि सम्मेलन यादगार रहा। उन्होंने सम्मेलन का शुभारंभ सरस्वती मां की वंदना के साथ किया।
हास्य कवि दिनेश बंटी की कविता आज एक ही कढ़ाई में गोता लगा लेंगे, दूध फट गया तो क्या रसगुल्ले बना लेंगे पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए। प्रमुख पैरोडीकार कवि पार्थ नवीन ने जर्दा है जर्दा, जर्दानशी को मैं मुर्दा न कर दूं तो कैंसर मेरा नाम नहीं सुनाकर बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चोट की। हास्य कवि राजेश लोटपोट की रचना हिंदी की कविता करना, कविता की हिंदी मत करना ने खूब वाह-वाही लूटी। कवि सम्मेलन में वीर रस के कवि अशोक चारण ने, जिन्होंने नीड़ छोड़कर पंछी के बच्चे यूं ही अकुलाते हैं, पेड़ छोड़ने वाले फल चाकू से काटे जाते हैं प्रस्तुत की तो पूरा पांडाल तालियों से गूंज उठा।
संचालन करते हुए डॉ. लोकेश जडिया ने अपनी कविता जिंदगी की उधड़ती चादर को खुशियों के धागों से सी लीजिए, मरने से पहले जिंदगी जी लीजिए को भी खूब दाद मिली। कवि करण सिंह राठौड़ ने भी काव्य पाठ किया। प्रारंभ में एसडीएम गजेंद्र शर्मा, तहसीलदार दिनेश चंद दिवाकर, थाना प्रभारी रामपाल शर्मा, उत्सव समिति के अध्यक्ष भागचंद चांपा व मंत्री अजय पारीक ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ग्रुप के पदाधिकारी सोनू हरवानी, अंकित सांखला, दीपक सोनी, कालूराम तुलसानी, हितेश वाधवानी, शिवराज आचार्य, प्रवीण पुरोहित, मयूर लड्ढा आदि ने कवियों का स्वागत किया। संचालन प्रतीक जैन ने किया। सामाजिक कार्यकर्ता किशन सिंह लाखनोत, चैनसिंंह पगारिया, शाखा प्रबंधक प्रतीक त्रिपाठी आदि विशेष अतिथि रहे।
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