फिर भीख का कटोरा लेकर पहुंचा पाकिस्तान, IMF ने कही ऐसा बात, शहबाज शरीफ की बढ़ी मुश्किल – Bharat24live

Shubham Raja
Date: 25-09-26 16:40
Pakistan IMF Deal: पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF का आर्थिक पैकेज अब सिर्फ कर्ज और किस्तों तक सीमित नहीं है. इस पैकेज को जारी रखने के लिए पाकिस्तान को कई बड़े कानूनी और नीतिगत बदलाव करने होंगे. पाकिस्तान के वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल ने नेशनल असेंबली की वित्त समिति को बताया कि IMF की शर्तें पूरी करने के लिए करीब 174 कानूनी संशोधन संसद से पास कराने होंगे. इनमें कई ऐसे फैसले हैं, जिन्हें लागू करना शहबाज शरीफ सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
इन बदलावों का असर टैक्स व्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र, सरकारी कंपनियों, सब्सिडी, गवर्नेंस, सॉवरेन वेल्थ फंड, चीनी बाजार और वित्तीय प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ेगा. सरकार इन प्रस्तावित बदलावों को संसद के सामने रखने की तैयारी कर रही है. पाकिस्तान पहले ही कुछ कदम उठा चुका है, जिसमें कई टैक्स छूट खत्म करना और सरकारी विभागों को अतिरिक्त अनुदान देने पर रोक शामिल है. IMF के कार्यक्रम में टैक्स बेस बढ़ाने, सरकारी वित्त को मजबूत करने और अर्थव्यवस्था में सरकार की गैर-जरूरी दखल कम करने पर जोर दिया गया है.
अब तक पाकिस्तान को कितना पैसा मिला?
वित्त सचिव के अनुसार, IMF कार्यक्रम की तीन समीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं और पाकिस्तान को अब तक करीब 4.1 अरब डॉलर मिल चुके हैं. हालांकि IMF के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में तीसरी समीक्षा पूरी होने के बाद EFF और RSF के तहत कुल वितरण करीब 4.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.
इससे साफ है कि IMF से पैसा मिलने के साथ पाकिस्तान को लगातार आर्थिक सुधार भी करने होंगे. हर समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि सरकार ने तय शर्तों को कितना पूरा किया है.
कहां-कहां बदलाव चाहता है IMF?
टैक्स और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव: पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में ऊर्जा क्षेत्र शामिल है. IMF बिजली और ऊर्जा व्यवस्था को ज्यादा टिकाऊ बनाने पर जोर दे रहा है. इसके साथ ही टैक्स छूट कम करने और सरकारी आय बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है. स्वास्थ्य और शिक्षा पर तय खर्च से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करना भी पाकिस्तान के लिए चुनौती बना हुआ है.
सरकारी अधिकारियों की संपत्ति पर नजर: IMF की शर्तों के तहत सरकारी अधिकारियों की संपत्ति से जुड़ी जानकारी की निगरानी बढ़ाने की तैयारी है. प्रस्तावित व्यवस्था में FBR कुछ अधिकारियों की संपत्ति से जुड़ी जानकारी इस्टैब्लिशमेंट डिवीजन के साथ साझा कर सकता है. अगर किसी अधिकारी की संपत्ति उसकी घोषित आय से मेल नहीं खाती है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है.
सॉवरेन वेल्थ फंड में बदलाव: 174 कानूनी संशोधनों में पाकिस्तान के सॉवरेन वेल्थ फंड से जुड़े कानून में बदलाव भी शामिल हैं. प्रस्तावित बदलावों में संयुक्त निवेश की अनुमति देने और फंड की जवाबदेही बढ़ाने की बात है. IMF सरकारी कंपनियों में सुधार और निजीकरण को भी अपने कार्यक्रम का अहम हिस्सा मानता है.
सब्सिडी कम करने की तैयारी: पाकिस्तान में बिजली, गैस और दूसरे क्षेत्रों में लंबे समय से बड़ी सब्सिडी दी जाती रही है. अब सरकार इन्हें धीरे-धीरे कम करने की दिशा में बढ़ रही है. IMF चाहता है कि ऊर्जा की कीमतें लागत के करीब लाई जाएं और जरूरतमंद लोगों के लिए लक्षित सहायता की व्यवस्था की जाए.
174 संशोधनों से क्या संकेत मिलते हैं?
इन सभी बदलावों को देखें तो पता चलता है कि IMF पाकिस्तान से केवल टैक्स बढ़ाने या बजट घाटा कम करने की मांग नहीं कर रहा है. उसका जोर आर्थिक व्यवस्था में बड़े संस्थागत बदलावों पर भी है. टैक्स से लेकर सरकारी कंपनियों तक, ऊर्जा क्षेत्र से सब्सिडी तक और अधिकारियों की जवाबदेही से लेकर निवेश व्यवस्था तक, इन संशोधनों का असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है.
अब पाकिस्तान के सामने बड़ी चुनौती इन कानूनों को संसद से पास कराने के साथ-साथ उन्हें जमीन पर लागू करने की भी है. IMF की आगे की समीक्षा में इन्हीं सुधारों की प्रगति अहम होगी.
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