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रोज सोचते हैं कि सुबह उठकर रनिंग करेंगे या जिम जरूर जाएंगे, लेकिन अचानक मन में ख्याल आता है कि अगर दौड़ते समय हार्ट अटैक आ गया तो? ये ख्याल मन में इसलिए आ रहा है क्योंकि आप पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो देख चुके हैं जिनमें लोगों को जिम में एक्सरसाइज करते समय हार्ट अटैक आ गया. इस वजह से मन में एक डर बैठ गया है कि कहीं कुछ हो गया तो क्या होगा. पिछले कुछ सालों में लोगों में ये डर बहुत बढ़ा है. इस डर को मेडिकल की भाषा में कार्डियोफोबिया कहते हैं.
यह कोई अलग मेडिकल बीमारी नहीं है बल्कि हार्ट अटैक का डर है. कार्डियोफोबिया क्यों है और इससे कैसे निपटें इस बारे में जानने के लिए Aajtak.in ने मेदांता – द मेडिसिटी हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्डियक सर्जन डॉ. नरेश त्रेहान से बात की है. डॉ. त्रेहान बताते हैं कि एक्सरसाइज करते समय हार्ट रेट बढ़ना, सांस तेज चलना, पसीना आना और शरीर में गर्मी महसूस होना सामान्य है, लेकिन जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक का डर बैठ गया हो, वह इन सामान्य बदलावों को भी खतरे का संकेत समझ सकता है.
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क्या होता है फोबिया
फोबिया किसी खास चीज या स्थिति से होने वाला बहुत ज्यादा और अक्सर बेकाबू कर देने वाला डर है फोबिया में डर का लेवल असल खतरे के मुकाबले बहुत ज़्यादा होता है. अगर आपको कार्डियोफोबिया है, तो आप मानसिक तनाव होने पर आप अपना ध्यान अपने दिल पर लगाते हैं. यह ध्यान इतना इतना ज्यादा होता है कि आपको लगता है कि आपको दिल की कोई असली बीमारी है, जबकि मेडिकल टेस्ट में ऐसा कुछ नहीं निकलत. आप बार-बार तसल्ली करना चाहते हैं कि कहीं हार्ट की कोई बीमारी तो नहीं हो गई है. कहीं अटैक तो नहीं आ जाएगा. इस वजह से बार- बार डॉक्टर के पास जा सकते हैं और उन कामों से बच सकते हैं जिनसे आपको लगता है कि आपके लक्षण बढ़ सकते हैं. लगता है कि एक्सरसाइज करने से हार्ट बीट बढ़ जाएगी तो हार्ट को कहीं कोई खतरा तो नहीं हो जाएगा, जबकि असल में ऐसा कुछ होता नहीं है. यही कार्डियोफोबिया है.
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कार्डियोफोबिया का क्या है इलाज
कार्डियोफोबिया का इलाज भी दूसरे फोबिया के इलाज की तरह ही किया जाता है. आपके डॉक्टर आपको साइकोथेरेपी, दवाएं या दोनों का कॉम्बिनेशन लेने की सलाह दे सकते हैं. आपके लिए कौन सा इलाज सही रहेगा, यह आपके लक्षणों की गंभीरता, आपकी लाइफस्टाइल और डॉक्टर की सलाह के हिसाब से होता है. कुछ मरीज की मेंटल हेल्थ थेरेपी (साइकोथेरेपी) की जाती है. इससे आपको अपनी सोच और डर से जुड़े व्यवहार को बदलने में मदद मिल सकती है. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) सबसे आम तरह की थेरेपी में से एक है. समय के साथ, CBT (या दूसरी तरह की थेरेपी) आपको अपने डर और एंग्जायटी का सामना करने में मदद कर सकती है.
हार्ट को हेल्दी कैसे रखें
डॉ. नरेश त्रेहान ने बताया कि हार्ट को फिट रखने के लिए सबसे जरूरी है कि आप स्ट्रेस कम करें, मानसिक तनाव जितना कम होगा उतना ही अच्छा है. अपने खानपान पर ध्यान दें. ये न सोचें कि बारिश का मौसम है तो पकोड़े की पूरी प्लेट ही खा लें. खाएं लेकिन एक दो पकोड़ा बहुत है. इसी तरह हर दिन पराठे न खाएं, हफ्ते या 15 दिन में एक दो बार खा सकते हैं. रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज करें और योग भी करें.
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