लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में राजभाषा हिंदी उत्सव के अंतर्गत ‘हिंदी के विकास में बोलियों का योगदान: वर्तमान परिप्रेक्ष्य एवं भविष्य की दिशा’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के संरक्षण में हिंदी प्रकोष्ठ, बीबीएयू, हिंदुस्तानी एकेडमी, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज तथा अखिल भारतीय साहित्य परिषद, अवध प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिंह रहीं। इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह, डी.सी.एस.के. पीजी कॉलेज, मऊ के प्राचार्य प्रो. सर्वेश पाण्डेय, हिंदी विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. रामपाल गंगवार तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव और डॉ. प्रीति राय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन तथा बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. विद्या बिंदु सिंह ने कहा कि हिंदी की सामाजिकता और समावेशी प्रकृति ने उसे निरंतर समृद्ध किया है। हिंदी के शब्दकोश में लोकभाषाओं की सांस्कृतिक शब्दावली और विभिन्न भाषायी स्रोतों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि हिंदी और उसकी बोलियों को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि अवधी, भोजपुरी, ब्रज, बुंदेली और मैथिली जैसी बोलियों ने हिंदी के शब्द भंडार, साहित्य और लोकसंस्कृति को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने डिजिटल युग में बोलियों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रो. सर्वेश पाण्डेय ने भी लोकभाषाओं को हिंदी की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए उनके महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी के दौरान हिंदी विभाग के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर हिंदी और उसकी बोलियों के पारस्परिक संबंध को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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