पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। चर्चित हिन्दी साहित्य संगठन तरुणोदय सांस्कृतिक विकास परिषद के तत्वावधान में 34 वां राष्ट्रीय हिन्दी साधक सम्मान समारोह जिला स्कूल प्रशाल में डॉ. मांगन मिश्र मार्तण्ड फारबिसगंज अररिया की अध्यक्षता में समारोह पूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाबा बैद्यनाथ झा, गिरजानन्द मिश्र, विशिष्ट अतिथि कल्पना तिवारी प्रतापगढ़ एवं डॉ उत्तिमा केशरी थे। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. गजाधर यादव ने किया। सर्वप्रथम आगत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया गया। स्वागत गान बाबा बैद्यनाथ झा ने तथा स्वागत-भाषण परिषद के संस्थापक कैलाश बिहारी चौधरी ने प्रस्तुत किया। लोकार्पण सत्र में प्रख्यात कवि बाबा बैद्यनाथ झा की तीन काव्य पुस्तकों यथा कुंडलिया-संसार, बाबा गीत सुनाएं एवं ग़ज़ल से आशिक़ी कब तक का भव्य-विमोचन किया गया।
विचार-सत्र में परिषद के अध्यक्ष अशोक आलोक, कल्पना तिवारी, प्रतापगढ़, नीतेश निखिल आदि ने हिन्दी को पूर्ण निष्ठा से अपनाने एवं हिंदी की प्रगति के लिए विस्तृत जानकारी दी। अपने अध्यक्षीय-भाषण में डॉ. मांगन मिश्र मार्तण्ड फारबिसगंज ने भारत की भाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के महत्व को स्वीकारने पर जोर दिया। सम्मान सत्र में डॉ. धर्मचंद विद्यालंकार हरियाणा को साहित्य गौरब सम्मान, प्रो. गजाधर यादव, रुपौली को साहित्य श्री सम्मान, डॉ. मिथिलेश राकेश, बरेली उ प्र को काव्य श्री साहित्य सम्मान, कर्मनिष्ठा हिंदी मासिक पत्रिका के संपादक डॉ. मोहन तिवारी आनंद, भोपाल (म प्र)को संपादक शिरोमणि सम्मान स्वरूप रेशमी चादर, प्रतीक चिह्न, सम्मान पत्र सहित एक हजार रुपए का चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी सत्र में ई. आलोक राई, त्रिवेणीगंज सुपौल को तरुणोदय साहित्य सम्मान स्वरूप रेशमी चादर, प्रतीक-चिह्न व सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन की शुरुआत कल्पना तिवारी की सरस्वती वंदना से हुई। इस सत्र में स्नेहा किरण, पंडित चंद्रशेखर झा, कनक तिवारी,सुरेन्द्र भारती, आलोक राई, त्रिवेणीगंज, रंजित तिवारी, नीतू, उत्तिमा केशरी, अशोक आलोक, गंगेश पाठक, बाबा बैद्यनाथ झा, प्रिया सिन्हा, हरि शंकर नीलकंठ, महेंद्र प्रसाद गुड़िया, प्रो. गजाधर यादव, कैलाश बिहारी चौधरी आदि ने अपनी-अपनी काव्य प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। समारोह में पांच सहभागी साहित्यकारों को हिन्दी साहित्य साधक सम्मान का सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। अन्त में परिषद संस्थापक कैलाश बिहारी चौधरी ने सफल आयोजन के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया।
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