Written By Varsha Sikri
अजीत डोभाल ने सुनाया चीनी सेना के साथ टकराव का दिलचस्प किस्सा (Photo: PTI)
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के कॉन्वोकेशन सेरेमनी में शिरकत की. इस दौरान उन्होंने करियर के शुरुआती दिनों का एक बेहद दिलचस्प और खौफनाक किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया- ”मैं एक युवा IPS अफसर था और इंटेलिजेंस के काम में नया था. मैं 20 साल की उम्र में और सिक्किम में इंटेलिजेंस का इंचार्ज था. उस समय वो भारत का हिस्सा नहीं था, बल्कि भारत का हिस्सा बनने की प्रक्रिया में था. मेरी जिम्मेदारी में बॉर्डर वाले इलाकों की देखरेख और PLA की गतिविधियों और चीनी सेना की हरकतों के बारे में इंटेलिजेंस इकट्ठा करना भी शामिल था. एक बार बॉर्डर वाले इलाके में हमारा एक इंटेलिजेंस मिशन था, और उन्हें लगभग आठ दिन बाद लौटना था. पांच दिन बीत गए, फिर दस दिन बीत गए, फिर शायद 15 दिन बीत गए. मेरे लिए ये बहुत चिंता की बात थी, ना सिर्फ प्रोफेशनल तौर पर बल्कि मानवीय नजरिए से भी कि इतने सारे लोग, हमें पता नहीं था कि वे जिंदा हैं या मर गए हैं, और उनके साथ क्या हुआ है.”
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अजित डोभाल ने आगे कहा- ” एवलांच या किसी और चीज की कोई रिपोर्ट नहीं मिली थी. ये गहरी चिंता की बात थी. लेकिन मुझे हेडक्वार्टर से फोन आया और मेरे बॉस ने मुझसे पूछा, “क्या तुमने कुछ लोगों को उस पार भेजा है?” मैंने कहा, “मुझे नहीं पता. वे आ रहे होंगे. उन्हें पांच या छह दिन में आ जाना चाहिए था, लेकिन अब लगभग दस या ग्यारह दिन हो गए हैं.” उन्होंने कहा, “वे अब चीनी कस्टडी में हैं. उन्हें चीनियों ने पकड़ लिया था और उनसे पूछताछ की गई थी. खैर, चीनियों ने उन्हें वापस कर दिया, शायद कुछ बातचीत या समझौते के बाद, या कोई डील हुई होगी. तो, वो पूरी तरह से टूटे हुए और बुरी हालत में लौटे और एक जांच शुरू हुई. मुझे पता था कि ये मेरे करियर का अंत है. मैंने इस घटना को बहुत ही अनप्रोफेशनल माना. जांच पूरी हुई. मुझे दोषी नहीं पाया गया. शायद, मैंने सब कुछ सही किया था. हेडक्वार्टर से हमें जो स्केच और मैप दिए गए थे, उनमें कुछ कमियां और गलतियां थीं. इसी वजह से ऐसा हुआ.”
NSA ने उस भावुक पल को शेयर करते हुए कहा- ”मैं बहुत दुखी था. ये जिंदगी का वो दौर था जब इंसान बहुत उदास महसूस करता है. अब तक मेरा करियर काफी अच्छा चल रहा था. मेरा एक साथी था, तिब्बत का एक पुराना शेरपा, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो में मेरे साथ काम करता था. उसने मुझसे पूछा कि सर आप इतने दुखी क्यों हैं. मैंने उसे बताया कि मैंने बहुत उम्मीदों और सपनों के साथ ये करियर शुरू किया था, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि सब कुछ गलत हो गया है. उसने कहा कि सर, ऐसा कुछ नहीं है. ये सब मैप-रीडिंग का खेल है. जिंदगी असल में बस एक सवाल है. कुछ लोग मैप सही से पढ़ पाते हैं, तो कुछ गलत. वो कई सालों तक बर्फ से ढके पहाड़ों में रहा था. उसने मुझे तीन बातें बताईं. पहली ये जानो कि तुम अभी कहां हो. दूसरी कि ये जानो कि तुम कहां जाना चाहते हो और तीसरी वहां तक पहुंचने का रास्ता जानो.”
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