Chatra News: सिमरिया, निज प्रतिनिधि सिमरिया को अनुमंडल का दर्जा मिले 12 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण क्षेत्र का शहरी स्वरूप आज भी अधूरा है। 3 मार्च 2014 को बड़े दावों के साथ सिमरिया अनुमंडल का गठन किया गया था, परंतु एक दशक से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी यहाँ न तो नगरपालिका का गठन हो सका है और न ही बुनियादी सरकारी महकमे शुरू हो पाए हैं। वर्तमान में पूरे अनुमंडल क्षेत्र का विकास पूरी तरह से ग्राम पंचायतों के सहारे चल रहा है। अनुमंडल बनने के बावजूद सिमरिया में अब तक ट्रेज़री (कोषागार), उप-कारा (जेल) और निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालय जैसी मूलभूत जरूरतें धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। नगरपालिका नहीं होने के कारण शहरीकरण के मानकों के अनुरूप विकास कार्य ठप हैं। बाजार क्षेत्र में साफ-सफाई की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण स्थानीय दुकानदारों को खुद ही कचरा प्रबंधन और सफाई का जिम्मा उठाना पड़ रहा है.
सिमरिया की सबसे बड़ी समस्या यहाँ का प्रदूषण और भारी यातायात है। विभिन्न कोल कंपनियों और एनटीपीसी की छाई व कोयला ढुलाई के लिए रोजाना यहाँ से लगभग तीन हजार भारी ट्रक गुजरते हैं। इन वाहनों से उड़ने वाले डस्ट (धूल) के कारण स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है। पूर्व में डस्ट से बचाव के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाता था, जो नाकाफी साबित हुआ.
भारी प्रदूषण से त्रस्त आम लोगों के उग्र विरोध के बाद, कोल ट्रांसपोर्टरों ने सड़कों की सफाई के लिए आधा दर्जन से अधिक स्थानीय महिलाओं को रोजगार पर रखा है। ये महिला मजदूर सुबह से ही सड़कों पर झाड़ू और सफाई कार्य में जुट जाती हैं, जिससे उड़ने वाली धूल से राहगीरों और स्थानीय निवासियों को थोड़ी राहत जरूर मिली है.
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और व्यवसायियों का कहना है कि जब तक सिमरिया में बाईपास सड़क का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक इस श्नरकीय स्थितिश् और जाम से मुक्ति मिलना नामुमकिन है। लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि सिमरिया को अविलंब नगरपालिका घोषित किया जाए और बाईपास सड़क सहित सभी लंबित अनुमंडलीय विभागों की शुरुआत की जाए ताकि क्षेत्र को वास्तविक अनुमंडल का दर्जा मिल सके.
फोटो01 अक्टूबर चतरा 3- सड़क की सफाई करती महिला
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