सऊदी-हूती जंग में ट्रंप की एंट्री! पर्दे के पीछे से अमेरिका दे रहा मदद, फिर क्यों टेंशन में CENTCOM? – Bharat24live

Shubham Raja
Date: 04-10-26 23:43
Saudi Arabia Houthis War: यमन में सऊदी अरब के समर्थन वाली सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. रविवार को यमन की सरकारी सेना ने हूतियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने का ऐलान किया. इसका मकसद हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना और देश में सरकार का नियंत्रण फिर से कायम करना है.
इस अभियान में सऊदी अरब यमनी सेना को हवाई मदद दे रहा है. वहीं अमेरिका सीधे युद्ध में शामिल होने के बजाय खुफिया जानकारी और टारगेटिंग से जुड़ी मदद दे रहा है. हालांकि, अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM यमन में एक नया सैन्य मोर्चा खोलने को लेकर सावधानी बरत रही है.
यमन में फिर शुरू हुआ सैन्य अभियान
यमन की राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने रविवार को सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने और पूरे देश में सरकार का नियंत्रण बहाल करने के लिए सेना को अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.
इस अभियान की तैयारी पिछले कई हफ्तों से चल रही थी. इसमें यमन सरकार के समर्थन वाली बड़ी संख्या में सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. अभियान का एक बड़ा लक्ष्य राजधानी सना समेत हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना है. सना लंबे समय से हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है.
सऊदी अरब इस अभियान में यमनी सेना को हवाई सुरक्षा और एयरस्ट्राइक के जरिए मदद दे रहा है. पिछले दिनों हूतियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच कई इलाकों में लड़ाई भी तेज हुई है.
पश्चिम एशिया में बाब-अल-मंदेब क्यों अहम?
इस अभियान का एक अहम मकसद बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास दोबारा नियंत्रण हासिल करना भी है. यह समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है.
हूतियों के इस इलाके में प्रभाव बढ़ने से लाल सागर के रास्ते आने-जाने वाले जहाजों पर दबाव बढ़ सकता है. इसका असर सामान की सप्लाई, समुद्री व्यापार और तेल की आवाजाही पर पड़ सकता है. इसी वजह से यमन की यह लड़ाई केवल स्थानीय संघर्ष नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है.
अमेरिका सीधे युद्ध में शामिल नहीं
सऊदी अरब चाहता है कि अमेरिका भी हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हमले करे. हालांकि, अभी अमेरिका ने सीधे युद्ध में उतरने से इनकार किया है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, वॉशिंगटन सऊदी अरब को हूती ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी और टारगेटिंग सपोर्ट दे रहा है.
यानी अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध करा रहा है, लेकिन फिलहाल अमेरिकी सेना खुद हूतियों पर हमले नहीं कर रही है. अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि अगर हालात ज्यादा बिगड़ते हैं तो आगे की रणनीति में बदलाव हो सकता है.
CENTCOM यमन में नया मोर्चा क्यों नहीं चाहता?
इस पूरे मामले में अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM का रुख भी अहम है. Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को यमन में सीधे हमले शुरू करने को लेकर गंभीर चिंताएं थीं. अमेरिकी सेना का एक बड़ा फोकस फिलहाल ईरान से जुड़े अभियान पर है.
ऐसे में यमन में नया सैन्य मोर्चा खोलने से अमेरिकी सेना के संसाधनों और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर असर पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसी वजह से अमेरिका फिलहाल सीधे लड़ाई में उतरने के बजाय सऊदी अरब और यमन की सरकारी सेना को खुफिया और टारगेटिंग सहायता तक सीमित रखना चाहता है.
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