दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। महाराष्ट्र सरकार ने उनके अंतिम संस्कार को राजकीय सम्मान के साथ करने की घोषणा की है।
राजकीय सम्मान के साथ होगा नाना का अंतिम संस्कार।
नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में गोवा में निधन।
महाराष्ट्र सरकार राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करेगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। हिंदी सिनेमा और मराठी रंगमंच के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से देश भर में शोक की लहर दौड़ गई है। इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने यह घोषणा की है कि अभिनेता का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
बता दें कि नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया है। नाना ने 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा। गोवा स्थित उनके घर पर दिल का दौरा पड़ने से उनका यह अचानक निधन हुआ।
बता दें कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर से फोन पर बातचीत की। उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया और बताया कि सरकार राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही है।
मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि यह निर्णय मराठी रंगमंच, मराठी और हिंदी सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान को सम्मान देने के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा कि नाना सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि किसानों से लेकर सैनिकों तक हर वर्ग के लिए एक ढाल की तरह खड़े रहते थे। वे किसानों के मुद्दों पर सरकार को भी बेबाकी से आईना दिखाते थे।
सामने आई जानकारी के मुताबिक, घटना के समय नाना पाटेकर अपने घर पर भतीजे प्रसाद पाटेकर के साथ थे। बीती रात से ही उन्हें सिरदर्द की शिकायत थी, जिसके बाद वे अचेत हो गए और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
गौरतलब है कि 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में जन्मे नाना पाटेकर अपनी संजीदगी, दमदार संवाद अदायगी और बेजोड़ किरदारों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘वेलकम’, ‘टैक्सी नंबर 9211’ और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में अमिट छाप छोड़ी।
अभिनय के अलावा वे समाज सेवा में भी सबसे आगे रहे। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की थी। इसके जरिए उन्होंने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में किसानों की मदद, जल संरक्षण, किसान आत्महत्याओं को रोकने और किसानों के बच्चों की शिक्षा के लिए सराहनीय कार्य किए।