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पंचायत आजतक हरियाणा के सेशन “कांग्रेस के अच्छे दिन कब आएंगे?’ में हरियाणा विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कई अहम मुद्दों पर बेबाकी से चर्चा की. दो सालों में नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार को वे कैसे देखते हैं, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजनीति तो सभी करते हैं, लेकिन इन दो सालों में हरियाणा विकास के हर पैमाने पर पिछड़ गया है, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के पास राज्य के लिए समय ही नहीं है. वे ज़्यादातर समय पंजाब और हिमाचल में व्यस्त रहते हैं, किसी भी राज्य, परिवार या संगठन की तरक्की के लिए उसके मुखिया का दूरदर्शी होना ज़रूरी होता है, लेकिन वर्तमान नेतृत्व में इस सोच का अभाव है.
वोट चोरी के आरोप और ईवीएम पर उठाए सवाल
कांग्रेस द्वारा चुनाव परिणामों के बाद उठाए गए ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर बात करते हुए हुड्डा ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पूरे प्रदेश में माहौल ऐसा था कि हर वर्ग कांग्रेस की सरकार बनाना चाहता था, उन्होंने अपनी बात को आंकड़ों के साथ रखते हुए कहा कि उनका परिवार कई सालों से लगातार चुनाव लड़ रहा है, लेकिन जैसा इस बार देखने को मिला था वैसा पहले कभी नहीं हुआ, मतदान के दिन की रात को चुनाव आयोग ने 61.19 प्रतिशत मतदान बताया, फिर दूसरे बढ़ाकर 65.65 प्रतिशत कर दिया गया और रात को यह आंकड़ा 67.90 प्रतिशत पहुंच गया. उन्होंने सवाल उठाया कि तीन दिनों के भीतर मशीनों में 7 प्रतिशत वोट अपने आप कैसे बढ़ गए, जिसका जवाब चुनाव आयोग ने आज तक नहीं दिया है.
दिल्ली में विपक्ष का प्रदर्शन और विपक्षी एकजुटता
दिल्ली में चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ चल रहे विपक्ष के धरने-प्रदर्शन को बीजेपी द्वारा ‘ड्रामा’ बताए जाने और विपक्षी सांसदों की अनुपस्थिति के दावों पर हुड्डा ने करारा जवाब दिया, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जब सरकार आंख और कान बंद कर ले, तो विपक्ष के पास जनता के हित में आवाज़ उठाने और सरकार को जगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता, उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडिया ब्लॉक के सभी घटक दल पूरी तरह से एकजुट हैं, किसी सांसद का किसी कारणवश किसी दिन न पहुंच पाना स्वाभाविक है, लेकिन पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एक साथ खड़ा है.
कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी का खंडन
‘कांग्रेस बनाम कांग्रेस’ यानी हुड्डा, शैलजा और सुरजेवाला खेमों की आपसी गुटबाजी से नुकसान होने के सवाल को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया. हुड्डा ने कहा कि यह सब मीडिया का बनाया हुआ नैरेटिव है और पार्टी पूरी तरह एकजुट होकर चुनाव लड़ी थी, उन्होंने कहा कि एक ही परिवार में विचारों का मतभेद हो सकता है, लेकिन कांग्रेस नेताओं के बीच कोई मनभेद नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर असली मनभेद देखना है तो बीजेपी में देखना चाहिए, जहां मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में उनकी ही पार्टी के सांसद और बड़े नेता नदारद रहते हैं,
गुड़गांव में जलभराव और सीवरेज प्रबंधन पर पलटवार
गुड़गांव में बारिश के दौरान होने वाले जलभराव के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने वाले बयानों का जवाब देते हुए हुड्डा ने कहा कि उनके 10 साल के कार्यकाल में कभी गुड़गांव की ऐसी दुर्दशा नहीं हुई, उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने ‘दीनदयाल’ योजना के नाम पर बिना ड्रेनेज, सड़क और सीवरेज की व्यवस्था किए धड़ाधड़ अवैध लाइसेंस बांट दिए, न तो सीवरेज और नालों की सफाई कराई गई और न ही पानी निकासी के लिए पंपों का रखरखाव किया गया. इस प्रशासनिक कुप्रबंधन के कारण आज दुनिया की बेहतरीन माइक्रोसिटी जलभराव का शिकार हो रही है.
10 साल की उपलब्धियों और विकास कार्यों का हिसाब
बीजेपी सरकार द्वारा भर्तियों में पारदर्शिता लाने और विकास के दावों पर हुड्डा ने अपनी सरकार के समय किए गए बड़े प्रोजेक्ट्स का ब्योरा दिया, उन्होंने कहा कि 2005 से पहले हरियाणा में भारी बिजली किल्लत थी, जिसे दूर करने के लिए उनकी सरकार ने 4 थर्मल पावर प्लांट और एक न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाया, उन्होंने कहा कि बीजेपी के 12 साल के शासन में एक भी नया पावर प्लांट या यूनिवर्सिटी नहीं बनी, आज अखबारों में छपे सरकारी विज्ञापनों में जिन प्रोजेक्ट्स का जिक्र है जैसे पंचकूला का NIFT, कुरुक्षेत्र का NID, करनाल का कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, सोनीपत की महिला यूनिवर्सिटी और राजीव गांधी एजुकेशन सिटी (IIT एक्सटेंशन) ये सब कांग्रेस सरकार की ही देन हैं, इसके अलावा झज्जर का AIIMS कैंसर संस्थान, मेवात, भिवानी और हिसार की यूनिवर्सिटी भी उनकी सरकार के दौरान ही स्थापित हुई थीं.
जब उनसे पूछा गया कि मुख्यमंत्री के रूप में ऐसा कौन-सा काम है जिस पर उन्हें सबसे ज़्यादा गर्व है और क्या वे आगे भी पार्टी का नेतृत्व करेंगे, तो हुड्डा भावुक हो गए, उन्होंने कहा कि पूरे हरियाणा का विकास और उसे शिक्षा और बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना उनके दिल के सबसे करीब रहा है, अपने व्यक्तिगत अनुभव का साझा करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार वे पानी में डूबने से बाल-बाल बचे थे और मौत के इतने करीब पहुंचने के बाद उन्होंने संकल्प लिया था कि वे अपना पूरा जीवन जनता की सेवा में समर्पित करेंगे, वे आगे भी जिस भी क्षमता में होंगे, हरियाणा की जनता की सेवा करते रहेंगे.
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