ट्रंप के पहले हफ्ते में अभी 'हाफ एजेंडा' ही आया सामने, सुधारों की असली पिक्चर तो अभी बाकी – Aaj Tak

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डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी. उन्होंने शपथ लेने के बाद पहले ही दिन ताबड़तोड़ कई कार्यकारी आदेश जारी किए थे. अब जबकि राष्ट्रपति पद संभाले हुए ट्रंप को एक हफ्ता हो गया है. तो ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि व्हाइट हाउस में ट्रंप का बीता हफ्ता कैसा रहा? उन्होंने कौन-कौन से बड़े फैसले लिए? और कौन-कौन से फैसले लिए जाने अभी बाकी हैं?
– राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार-प्रसार के दिनों से ही ट्रंप की हिटलिस्ट में अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे प्रवासी थे. इन अवैध प्रवासियों के लिए वह पड़ोसी मुल्कों कनाडा, मेक्सिको और कोलंबिया को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. ऐसे में पद संभालने के पहले ही दिन उन्होंने सबसे पहले दक्षिणी सीमा पर प्रवासियों के प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश जारी किया. इसके साथ ही उन्होंने मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के प्रयासों को फिर से शुरू किया है और अवैध रूप से या अस्थाई वीजा पर अमेरिका में रहने वाले प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता देने से इनकार कर दिया.
– डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका में अब से दो ही जेंडर होंगे- पुरुष और महिला. उन्होंने इसे मान्यता देने की बात कही और उन फाइलों पर साइन किए जिनमें जेंडर विचाधारा या फिर विविधता को बढ़ावा देने वाले सभी कार्यक्रमों को खत्म करने पर जोर है. 
– ट्रंप ने कार्यकाल के पहले ही दिन पेरिस जलवायु समझौते से पीछे हटने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी. उन्होंने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया.
– इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अमेरिका के हटने के आदेश पर भी हस्ताक्षर किया. 
– डोनाल्ड ट्रंप ने टिकटॉक पर बैन को 75 दिनों के लिए टाल दिया. उन्होंने अरबपति कारोबारी एलॉन मस्क को सुझाव भी दिया कि वह इसे खरीद लें.
– ट्रंप ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी, उनके भाई रॉबर्ट कैनेडी और मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्याओं से जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने के भी आदेश दिए. 
– छह दिसंबर 2021 को अमेरिकी संसद पर हुए हमले के लगभग 1600 आरोपियों को भी ट्रंप ने माफ कर दिया. 
ट्रंप का एजेंडा अभी बाकी है…
डोनाल्ड ट्रंप की हिटलिस्ट में ऐसे कई एजेंडे हैं, जिन्हें वह सिलसिलेवार तरीके से लागू करेंगे. ट्रंप सरकार जल्द ही एक्सटर्नल रेवेन्यू सर्विस (External Revenue Service) नाम से एक नया सरकारी विभाग शुरू करेगी. इस विभाग का काम विदेशों से होने वाली आय और लगाने जाने वाले टैरिफ की समय पर वसूली करना होगा. इस विभाग के तहत कस्टम, टैरिफ और विदेशी स्रोत से होने वाली अन्य कमाई को इकट्ठा किया जाएगा.
ऐसा माना जा रहा है कि कनाडा, मेक्सिको और चीन जैसे देशों पर दबाव बनाने के लिए इस विभाग का गठन किया जा रहा है ताकि कारोबार में असंतुलन, माइग्रेशन और ड्रग्स तस्करी जैसे मुद्दों को सुलझाया जा सके. इसके अलावा ट्रंप का चीन सहित कई अन्य देशों के उत्पादों पर भी टैक्स बढ़ाने का इरादा है. ये भी कहा जा रहा है कि ट्रंप अन्य देशों से इंपोर्ट होने वाले सामानों पर टैरिफ बढ़ाने का जल्द ऐलान कर सकते हैं.
ट्रंप का इरादा कनाडा को अमेरिका का 51वां स्टेट बनाने का भी है. वह इसे लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को ऑफर भी दे चुके हैं. इसके साथ ही वह ग्रीनलैंड और पनामा नहर पर भी अमेरिकी अधिकार की बातें कर चुके हैं और ये सब उनके एजेंडे में शामिल हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप देश की खुफिया एजेंसी एफबीआई के कामकाज से भी खफा रहे हैं. वह चुनाव जीतने के बाद बोल चुके हैं कि एफबीआई हेडक्वार्टर को बंद करने उनके एजेंडे में होगा. लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है.
ठीक इसी तरह ट्रंप ने शिक्षा विभाग को भी बंद करने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि वह एजुकेशन डिपार्टमेंट बंद कर इसके समानांतर नया डिपार्टमेंट खोलेंगे.
इससे पहले ट्रंप ने अरबपति कारोबारी एलॉन मस्क और भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी को डिपार्टमेंट ऑफ गवर्मेंट एफिशियंसी (DOGE) की जिम्मेदारी सौंपी थी. इस विभाग का काम कई पुरानी नीतियों और समितियों को समाप्त करना और पूरे संघीय ढांचे में जरूरी बदलाव करने की होगी.
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