Rashmi Singh
Date: 09-10-26 14:27
Maa Durga Favourite Flowers: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के लिए भक्त घरों से लेकर मंदिरों तक विशेष तैयारियां करते हैं. कोई माता की चौकी सजाता है, तो कोई नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी के नौ स्वरूपों की पूजा करता है. इस दौरान फूलों का भी खास महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी के प्रत्येक स्वरूप को अलग-अलग फूल अर्पित करना शुभ होता है. ऐसे में अगर आप भी नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा को विशेष बनाना चाहते हैं, तो जानिए नौ दिनों में किस देवी को कौन-सा फूल चढ़ाने की परंपरा है और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
मां के नौ रूप और प्रिय फूल
शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी. नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी. धार्मिक परंपराओं में प्रत्येक स्वरूप के लिए कुछ विशेष फूलों का उल्लेख मिलता है. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और पूजा-पद्धतियों में फूलों को लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं.
पहले दिन मां शैलपुत्री को चढ़ाएं सफेद फूल
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस दिन देवी को सफेद कनेर के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. सफेद रंग को शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. भक्त श्रद्धापूर्वक फूल अर्पित कर देवी से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं.
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की करें आराधना
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. इस दिन वट वृक्ष के फूल या गुड़हल अर्पित करने की परंपरा कुछ पूजा-विधियों में बताई जाती है. मां ब्रह्मचारिणी को तप, त्याग और संयम का प्रतीक माना जाता है. भक्त इस दिन देवी की आराधना कर जीवन में धैर्य और आत्मबल बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं.
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को अर्पित करें कमल
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. इस अवसर पर कमल या पीले रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को साहस और शक्ति का स्वरूप बताया गया है. भक्त देवी को फूल चढ़ाकर सुख-शांति और संकटों से रक्षा की कामना करते हैं.
चौथे दिन मां कुष्मांडा को चढ़ाएं गुड़हल
नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होती है. इस दिन गुड़हल या चमेली के फूल अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है. मां कुष्मांडा को सृष्टि की ऊर्जा और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है. भक्त पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं.
पांचवें दिन मां स्कंदमाता को अर्पित करें पीले फूल
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है. इस दिन पीले रंग के फूल, जैसे गेंदे के फूल, चढ़ाना शुभ माना जाता है. कुछ परंपराओं में रातरानी के फूलों का भी उल्लेख मिलता है. भक्त मां स्कंदमाता से संतान की सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली की प्रार्थना करते हैं.
छठे दिन मां कात्यायनी को चढ़ाएं गेंदे के फूल
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. देवी को गेंदे या अन्य पीले फूल अर्पित करने की मान्यता है. मां कात्यायनी को साहस, शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है. इस दिन भक्त देवी की पूजा कर जीवन की बाधाओं को दूर करने की कामना करते हैं.
सातवें दिन मां कालरात्रि को अर्पित करें नीले फूल
सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है. इस दिन अपराजिता या कृष्णकमल जैसे नीले फूल अर्पित करने की परंपरा कुछ मान्यताओं में मिलती है. मां कालरात्रि को नकारात्मकता और भय से मुक्ति दिलाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. भक्त उनसे साहस और सुरक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं.
आठवें दिन मां महागौरी को चढ़ाएं सफेद फूल
नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा की जाती है. देवी को मोगरा या चमेली जैसे सफेद फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. सफेद रंग को शुद्धता और शांति का प्रतीक माना जाता है. इस दिन कई भक्त कन्या पूजन भी करते हैं और मां से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं.
नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को अर्पित करें चंपा
नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इस दिन चंपा या गुड़हल के फूल अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है. मां सिद्धिदात्री को सिद्धियों और आध्यात्मिक उन्नति से जोड़कर देखा जाता है. भक्त नौ दिनों की पूजा पूरी होने पर देवी का आभार व्यक्त करते हैं और परिवार की मंगलकामना करते हैं.
मां दुर्गा को फूल चढ़ाते समय किन नियमों का रखें ध्यान?
देवी पूजन में फूलों की सुंदरता से ज्यादा उनकी स्वच्छता और भक्त की श्रद्धा को महत्व दिया जाता है. पूजा के लिए ताजे, साफ और अच्छी स्थिति वाले फूल चुनें. मुरझाए, सड़े या कीड़े लगे फूलों को अर्पित करने से बचें. फूल तोड़ते समय भी स्वच्छता का ध्यान रखें और पूजा की सामग्री को साफ स्थान पर रखें. लाल और पीले फूल कई देवी-पूजा परंपराओं में विशेष रूप से पसंद किए जाते हैं, लेकिन फूलों का चयन स्थानीय रीति-रिवाज और परिवार की पूजा-पद्धति के अनुसार किया जा सकता है.
नवरात्रि में कौन-से फूल चढ़ाने से बचना चाहिए?
नवरात्रि में फूलों को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग नियम बताए गए हैं. सामान्य तौर पर बासी, मुरझाए, गंदे या जमीन पर गिरे फूलों का इस्तेमाल पूजा में नहीं करना चाहिए. मदार, धतूरा, केतकी, तगर और जूही जैसे फूलों को लेकर भी विभिन्न पूजा-पद्धतियों में अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं. इसलिए किसी फूल को पूरी तरह वर्जित मानने से पहले अपने क्षेत्र की परंपरा या पूजा-विधि का ध्यान रखना बेहतर है.
ये भी पढ़ें- नवरात्रि में बुझ जाए अखंड ज्योत या गिर जाए कलश, घबराएं नहीं! तुरंत करें ये उपाय
भारत 24 लाइव — भारत का विश्वसनीय हिंदी समाचार पोर्टल। ताज़ा खबरें, विश्लेषण, वीडियो।
लाइव भारत 24 ऐप डाउनलोड करें और लाइव समाचार देखें