भाषा सीखने के लिए रटने से ज्यादा जरूरी है सुनना – Hindustan

– ब्रिटेन और जापान के शोधकर्ताओं ने किया अध्ययन लंदन, एजेंसी। अगर आप फ्रेंच, अरबी या हंगेरियन जैसी नई भाषा सीखना चाहते हैं, तो शब्दों और व्याकरण को रटने के बजाय भाषा की आवाजों और उनके उच्चारण को समझने की कोशिश करें। एक नए अध्ययन के मुताबिक, किसी भाषा को जल्दी और सही तरीके से सीखने में हमारी सुनने की क्षमता अहम भूमिका निभाती है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और जापान की तोहोकू यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि कुछ लोग नई भाषाओं का उच्चारण दूसरों के मुकाबले आसानी से कैसे सीख लेते हैं। इसके लिए उन्होंने अंग्रेजी सीख रहे 67 जापानी लोगों की सुनने की क्षमता का अध्ययन किया।
शोधकर्ताओं ने जांचा कि लोग आवाज की पिच यानी उतार-चढ़ाव, उच्चारण में लगने वाला समय और स्वर में होने वाले बहुत छोटे बदलावों को कितनी बारीकी से पहचान सकते हैं। इस दौरान उन्होंने ऐसी आवाजों का भी इस्तेमाल किया, जो किसी भाषा के शब्द नहीं थीं। इसके बाद एमआरआई की मदद से प्रतिभागियों के दिमाग की गतिविधियों को देखा गया।
सुनने की क्षमता सबसे अहम
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को अंग्रेजी के ऐसे स्वर पहचानने के लिए कहा गया, जो जापानी भाषा में नहीं पाए जाते। अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों की सुनने की क्षमता ज्यादा सटीक थी, वे नई भाषा के अपरिचित उच्चारण को दूसरों की तुलना में ज्यादा सटीकता से सीख पाए। उनके दिमाग में आवाजों को समझने का तरीका भी अलग था। वे विदेशी भाषा की आवाजों को समझने के लिए अपनी मातृभाषा के उच्चारण के नियमों पर कम निर्भर थे।
मातृभाषा के नियमों से अलग समझना जरूरी
अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों की सुनने की क्षमता ज्यादा सटीक होती है उनका दिमाग नई आवाजों को पुराने नियमों में ढालने के बजाय उन्हें अलग तरीके से पहचान पाता है। इससे उनके लिए सही उच्चारण सीखना आसान हो जाता है। इसके उलट, जिन लोगों की सुनने की क्षमता कम सटीक थी वे विदेशी भाषा की आवाजों को समझते समय अपनी मातृभाषा के उच्चारण के नियमों पर ज्यादा निर्भर रहे। इस कारण उन्हें सीखने में अधिक समय लगता है।
भाषा सिखाने का तरीका बदलने का सुझाव
अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. काजुया साइतो-वैन पोएटरेन ने कहा कि विदेशी भाषा पढ़ाने के तरीकों में बदलाव की जरूरत है। केवल ज्यादा अभ्यास कराने के बजाय विद्यार्थियों की सुनने और ध्वनियों को पहचानने की क्षमता को भी विकसित किया जाना चाहिए। इससे उन्हें उन आवाजों को समझने में मदद मिल सकती है, जो उनकी मातृभाषा में मौजूद नहीं हैं।
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