Yuvraj Singh
Date: 17-10-26 00:02
दुनिया की आर्थिक ताकतों के बीच भारत अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है. अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नए अनुमान ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी तस्वीर पेश की है. अनुमान है कि साल 2027 में भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. अगर ऐसा होता है, तो वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में भारत की स्थिति और मजबूत होगी. खास बात यह है कि जहां भारत की विकास दर को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं जापान की अर्थव्यवस्था धीमी रफ्तार, महंगाई और कमजोर मुद्रा जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है.
2027 में कितनी बड़ी हो सकती है भारत की अर्थव्यवस्था?
IMF के अक्टूबर 2026 के अनुमानों के मुताबिक, भारत की नॉमिनल GDP साल 2027 में करीब 4.52 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. इस आंकड़े के साथ भारत वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग में चौथे स्थान पर आ सकता है. वहीं, जापान की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 4.47 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. ब्रिटेन की GDP भी लगभग 4.49 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. इन अनुमानों के आधार पर भारत ब्रिटेन और जापान से आगे निकल सकता है. हालांकि, ये भविष्य के अनुमान हैं और वास्तविक स्थिति आर्थिक परिस्थितियों तथा मुद्रा विनिमय दरों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगी.
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कौन-कौन शामिल?
IMF के अनुमान के अनुसार, 2027 में अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रह सकता है. इसके बाद चीन और जर्मनी का स्थान रहने की संभावना है. भारत चौथे पायदान पर पहुंच सकता है, जबकि ब्रिटेन पांचवें और जापान छठे स्थान पर खिसक सकता है. यह बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलते समीकरणों को दिखाता है. भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि उसे आगे बढ़ने का अवसर दे रही है, जबकि जापान को अपनी विकास दर बनाए रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
IMF ने भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाया
भारत की आर्थिक संभावनाओं को देखते हुए IMF ने साल 2026 के लिए देश की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. यह अनुमान ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है. भारत की घरेलू मांग, आर्थिक गतिविधियों और विकास की रफ्तार को इस सकारात्मक अनुमान की अहम वजहों में गिना जा रहा है. हालांकि, आगे भी इस गति को बनाए रखने के लिए निवेश, रोजगार, उत्पादकता और आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देना जरूरी होगा.
जापान की अर्थव्यवस्था क्यों पड़ सकती है धीमी?
जापान लंबे समय से दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल रहा है, लेकिन अब उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. IMF के अनुमान के मुताबिक, 2026 में जापान की आर्थिक विकास दर महज 0.7 प्रतिशत रह सकती है. देश में बढ़ती महंगाई, ऊर्जा की महंगी कीमतें और डॉलर के मुकाबले येन की कमजोरी आर्थिक दबाव बढ़ा रही हैं. कमजोर येन के कारण आयात महंगा होता है, जिसका असर कारोबार और आम लोगों के खर्च पर भी पड़ सकता है. इसके अलावा, जापान की बढ़ती उम्र वाली आबादी भी आर्थिक गतिविधियों और कामकाजी लोगों की उपलब्धता के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
भारत की GDP को लेकर IMF ने क्या कहा?
भारत की अर्थव्यवस्था के आकार को लेकर IMF ने एक और अहम बात कही है. संस्था ने भारत की GDP की गणना के लिए अपनाई गई संशोधित पद्धति का स्वागत किया है. IMF के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन के मुताबिक, भारत में GDP की गणना में किए गए बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों और संस्था की ओर से दिए गए सुझावों के अनुरूप हैं. उन्होंने भारत के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना भी की. हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आंकड़ों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बेहतर बनाने की गुंजाइश बनी हुई है.
क्या हर भारतीय को होगा फायदा?
भारत का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकती है, लेकिन GDP रैंकिंग में ऊपर पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि हर नागरिक की आय या जीवन स्तर अपने आप बढ़ जाएगा. आर्थिक विकास का वास्तविक फायदा लोगों तक पहुंचाने के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, महंगाई पर नियंत्रण रखना, बुनियादी सुविधाओं में निवेश करना और प्रति व्यक्ति आय में सुधार करना भी जरूरी है. इसलिए भारत की आर्थिक रैंकिंग के साथ-साथ यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि विकास का लाभ आम लोगों, छोटे कारोबारों और युवाओं तक किस हद तक पहुंचता है.
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