Shreeom Singh
Date: 16-10-26 11:29
Global Hunger Index: ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2025 की रिपोर्ट में पाकिस्तान की स्थिति चिंताजनक बताई गई है. दक्षिण एशिया में पाकिस्तान का भुखमरी स्कोर सबसे ज्यादा रहा. रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक संकट, महंगाई, प्राकृतिक आपदाओं और दुनिया में चल रहे संघर्षों ने देश में खाद्य संकट को और बढ़ा दिया है.
दक्षिण एशिया में थम रही सुधार की रफ्तार
यह रिपोर्ट वेल्थंगरहिल्फे, जर्मनी की रूर यूनिवर्सिटी बोचुम के एक संस्थान और स्विस संगठन हेल्वेटास ने मिलकर जारी की है. इसकी थीम है, ‘खाद्य सुरक्षा के बिना कोई सुरक्षा नहीं’. रिपोर्ट के अनुसार, 2018 के बाद से दक्षिण एशिया में भुखमरी के हालात सुधारने की रफ्तार धीमी हुई है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान में स्थिति और बिगड़ी है.
पाकिस्तान में आर्थिक अस्थिरता और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. कई परिवारों के लिए पर्याप्त भोजन जुटाना मुश्किल हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 के बाद देश में कुपोषण की स्थिति भी बिगड़ी है. बच्चों में उम्र के हिसाब से कम वजन होने की समस्या गंभीर स्तर पर पहुंच गई है.
बाढ़ और सूखे से फसलों को नुकसान
दक्षिण एशिया का हंगर इंडेक्स स्कोर 23.5 रहा है. यह साल 2000 के 37.5 के स्कोर से बेहतर है, लेकिन ज्यादातर सुधार 2018 से पहले हुआ था. पाकिस्तान और बांग्लादेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ से फसलों को नुकसान पहुंचा है. वहीं, अफगानिस्तान में कम बारिश और ज्यादा तापमान के कारण अनाज उत्पादन प्रभावित हुआ है.
दक्षिण एशिया में करोड़ों लोग कुपोषण के शिकार
खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक, 2023 से 2025 के बीच दक्षिण एशिया में करीब 21.8 करोड़ लोग कुपोषण का सामना कर रहे थे. इसमें ईरान भी शामिल है. यह दुनिया के कुल कुपोषित लोगों का लगभग एक तिहाई है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बच्चों की लंबाई उम्र के हिसाब से कम रहने की समस्या भी बनी हुई है.
रिपोर्ट के अनुसार, करीब दो दशक की प्रगति के बाद दुनियाभर में भुखमरी फिर बढ़ रही है. 2026 का वैश्विक स्कोर 18.1 रहा, जबकि 2018 में यह 17.6 था. साल 2018 के बाद से 32 देशों में भुखमरी बढ़ी है. वहीं, 57 देश ऐसे हैं जो 2030 तक भुखमरी का निम्न स्तर हासिल करने में पीछे रह सकते हैं.
युद्ध और महंगाई से बढ़ सकता है संकट
रिपोर्ट में सशस्त्र संघर्षों और प्राकृतिक आपदाओं को खाद्य संकट बढ़ने की बड़ी वजह बताया गया है. ईरान में संघर्ष और होर्मुज तथा बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में माल ढुलाई में रुकावट से ईंधन, परिवहन और खाद की लागत बढ़ रही है. वहीं, यूक्रेन में जारी युद्ध और काला सागर से गेहूं के निर्यात में आने वाली बाधाओं से भी कीमतें बढ़ने का खतरा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय खर्च घटकर 2016-2017 के स्तर पर आ गया है. इससे राहत कार्यक्रमों और जरूरतमंदों को राशन देने जैसी योजनाओं पर असर पड़ रहा है. रिपोर्ट में सरकारों से अपील की गई है कि वे मानवीय सहायता और आंकड़े जुटाने के लिए फंडिंग में की गई कटौती वापस लें, ताकि आने वाले संकटों से निपटा जा सके.
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