Shreeom Singh
Date: 17-10-26 07:26
Navratri Day 7 Maa Kalaratri Puja: शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों को बुरी शक्तियों और भय से बचाती हैं. उनका स्वरूप भले ही डरावना दिखाई देता है, लेकिन वे अपने भक्तों का कल्याण करने वाली देवी मानी जाती हैं. मां की पूजा से साहस और शक्ति मिलने की मान्यता है.
नवरात्रि के सातवें दिन भक्त मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाते हैं. इसके बाद मंत्र जाप और आरती करके परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं. आइए जानते हैं मां कालरात्रि के स्वरूप, पूजा विधि, भोग, मंत्र और आरती से जुड़ी जरूरी बातें.
मां कालरात्रि का स्वरूप और महत्व
मां कालरात्रि मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनका रंग गहरा है, बाल खुले रहते हैं और गले में चमकने वाली माला होती है. उनकी चार भुजाएं हैं. दो हाथों में अस्त्र रहते हैं, जबकि अन्य दो हाथ भक्तों को आशीर्वाद देने और निडर रहने का संदेश देते हैं. मां कालरात्रि का वाहन गधा माना जाता है.
मां कालरात्रि को बुरी शक्तियों का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. उन्हें शुभंकरी नाम से भी जाना जाता है. भक्त मां से डर दूर करने, मुश्किलों का सामना करने की शक्ति और जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं. यह धार्मिक आस्था और मान्यताओं से जुड़ा विषय है.
मां कालरात्रि को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई चढ़ाने की परंपरा है. इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा और घर की परंपरा के अनुसार फल या अन्य सात्विक पकवान भी अर्पित कर सकते हैं.
भोग तैयार करते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें. पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांट दें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां को भोग लगाना उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने का एक तरीका है.
मां कालरात्रि की पूजा विधि
नवरात्रि के सातवें दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं. मां कालरात्रि का ध्यान करें और उन्हें फूल, रोली, अक्षत, चंदन और भोग अर्पित करें.
इसके बाद मां के मंत्र का जाप करें और श्रद्धा के साथ आरती करें. पूजा के अंत में मां से अपने परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें. पूजा में सभी सामग्री उपलब्ध न होने पर घर में मौजूद चीजों से भी मां की आराधना की जा सकती है.
मां कालरात्रि का पूजा मंत्र
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है.
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः.
मां के स्वरूप का ध्यान करने के लिए इस मंत्र का पाठ भी किया जाता है.
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता.
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी.
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा.
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करके भक्त साहस, सुरक्षा और सुख-शांति की कामना करते हैं.
मां कालरात्रि की आरती
मां कालरात्रि की पूजा के बाद मां दुर्गा की आरती की जा सकती है. नवरात्रि में गाई जाने वाली प्रसिद्ध आरती ‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ के कुछ प्रमुख अंश इस प्रकार हैं.
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली.
तेरे ही गुण गाएं भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
तेरे भक्त जनों पर,
भीड़ पड़ी है भारी मां.
दानव दल पर टूट पड़ो,
मां करके सिंह सवारी.
सौ-सौ सिंहों से बलशाली,
अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को पल में संहारती.
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
मां-बेटे का है इस जग में,
बड़ा ही निर्मल नाता.
पूत-कपूत सुने हैं, पर न,
माता सुनी कुमाता.
सब पर करुणा बरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती.
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
नहीं मांगते धन और दौलत,
न चांदी, न सोना मां.
हम तो मांगें मां तेरे मन में,
इक छोटा सा कोना.
सबकी बिगड़ी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती.
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को साहस और शक्ति की प्रेरणा मिलती है. इस दिन मां का ध्यान करके परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना की जाती है.
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