Navratri 2026: एक ही दिन होगी अष्टमी-नवमी? तारीख को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, जानें कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त – Bharat24live

Yuvraj Singh
Date: 17-10-26 16:23
Navratri 2026: शारदीय नवरात्र के आखिरी दिनों में मां दुर्गा के भक्तों के लिए अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व होता है. इन दोनों तिथियों पर घरों में हवन, पूजा और कन्या पूजन की तैयारियां की जाती हैं. लेकिन साल 2026 में तिथियों के संयोग ने भक्तों के मन में सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कन्या पूजन 18, 19 या 20 अक्टूबर में से किस दिन करना शुभ रहेगा. पंचांग के अनुसार, इस बार 19 अक्टूबर को ही महाअष्टमी और महानवमी दोनों का पूजन किया जाएगा. ऐसे में अगर आप भी कन्याओं को भोजन कराने और नवरात्र व्रत का समापन करने की तैयारी कर रहे हैं, तो सही तिथि और मुहूर्त जानना जरूरी है. 
अष्टमी और नवमी 2026 में एक ही दिन क्यों पड़ रही हैं?
हिंदू पंचांग में त्योहारों की तारीख केवल अंग्रेजी कैलेंडर से नहीं, बल्कि तिथि और सूर्योदय के आधार पर निर्धारित होती है. साल 2026 में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी. इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक चलेगी. चूंकि 18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि रहेगी और 19 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी होगी, इसलिए कई उत्तर भारतीय पंचांगों में महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को ही निर्धारित किया गया है. 
कन्या पूजन 2026 की सही तारीख और शुभ मुहूर्त
नवरात्र में कन्या पूजन अष्टमी या नवमी के दिन करने की परंपरा है. दिल्ली के पंचांग के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 को अष्टमी के दौरान कन्या पूजन का शुभ समय सुबह 8:29 बजे से 10:16 बजे तक बताया गया है. इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी. नवमी के दिन पूजा करने वाले भक्तों के लिए इसी तारीख को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक रहेगा. ये समय दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं, इसलिए दूसरे शहरों में पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि कर लें. 
कन्या पूजन में किन बातों का रखें ध्यान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन में छोटी बच्चियों को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है. इस दिन कन्याओं के पैर धोकर उन्हें तिलक लगाया जाता है और हलवा, पूरी तथा चने का प्रसाद खिलाया जाता है. भोजन के बाद उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है. कई परिवार कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराते हैं, जिसे भैरव स्वरूप माना जाता है. पूजा के दौरान स्वच्छता, श्रद्धा और कन्याओं के सम्मान का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
अष्टमी पर व्रत रखें या नवमी पर?
नवरात्र में कुछ भक्त अष्टमी के दिन व्रत खोलते हैं, जबकि कई परिवार नवमी पर हवन और कन्या पूजन के बाद व्रत का पारण करते हैं. वर्ष 2026 में तिथियों के एक ही दिन पड़ने के कारण दोनों परंपराओं का पालन करने वाले भक्त 19 अक्टूबर को पूजा कर सकते हैं. हालांकि, नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर तक रहने के कारण कुछ परिवार उदया तिथि और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार 20 अक्टूबर को भी पूजा कर सकते हैं. इसलिए व्रत का पारण करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से सलाह लेना बेहतर रहेगा. 
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. भारत 24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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