Rashmi Singh
Date: 20-10-26 12:31
India-US Relations: भारत और अमेरिका के रिश्तों में जारी खींचतान के बीच दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों की मुलाकात पर सबकी नजरें टिकी हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को मुंबई में बैठक करेंगे. इस बातचीत में रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, व्यापार, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहने की उम्मीद है. दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार समझौते को लेकर मतभेद बने हुए हैं. ऐसे में यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर सहमति तलाशने के लिहाज से अहम मानी जा रही है.
भारत-अमेरिका बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
जयशंकर और रुबियो की बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर भी चर्चा होने की संभावना है. दोनों पक्ष रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के अलावा तकनीक, ऊर्जा, व्यापार और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति से जुड़े विषयों पर विचार कर सकते हैं. इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना दोनों देशों की रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं में शामिल है.
इसके अलावा यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों तथा उनके कारण खाद्य, ईंधन और उर्वरक आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी बातचीत हो सकती है. भारत की ओर से रूस-यूक्रेन युद्ध में युद्धविराम से जुड़ा प्रस्ताव रखे जाने की बात सामने आई है. इसका उद्देश्य ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के साथ-साथ काला सागर में व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों को रोकना बताया गया है.
व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर रहेगा जोर
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत फिलहाल ठहरी हुई है. इसके बावजूद दोनों देशों के अधिकारी किसी सहमति तक पहुंचने के लिए संभावित रास्ते तलाश रहे हैं. टैरिफ संबंधी मतभेदों के बीच व्यापारिक संबंधों को स्थिर करना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है.
बैठक में तकनीक, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है. ये क्षेत्र वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं, औद्योगिक विकास और रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत का उद्देश्य मतभेदों के बावजूद सहयोग के अवसरों को आगे बढ़ाना हो सकता है.
रुबियो की भारत यात्रा क्यों है अहम?
उज्बेकिस्तान की यात्रा के बाद मार्को रुबियो मंगलवार को व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुंबई पहुंचेंगे. मई के बाद यह उनकी दूसरी भारत यात्रा है. इससे पहले उन्होंने नई दिल्ली में एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बातचीत की थी और क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था. इस बार की बैठक ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका के संबंधों में व्यापार नीति, टैरिफ और अन्य रणनीतिक मुद्दों को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं. इसलिए दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत को सहयोग के मौजूदा क्षेत्रों की समीक्षा और भविष्य की प्राथमिकताओं पर चर्चा के अवसर के रूप में देखा जा रहा है.
भारत-अमेरिका के रिश्तों में तनाव की वजह क्या है?
पिछले एक साल में भारत और अमेरिका के संबंधों में कई मुद्दों को लेकर तनाव सामने आया है. इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीतियां, भारतीय पेशेवरों पर लागू पाबंदियां और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों को लेकर मतभेद शामिल हैं. व्यापार समझौते पर बातचीत में रुकावट भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए चुनौती बनी हुई है. हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पक्ष समझौते की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं. ऐसे में मुंबई में होने वाली बैठक से यह समझने का अवसर मिलेगा कि व्यापार और रणनीतिक सहयोग के मुद्दों पर आगे किस तरह प्रगति की जा सकती है.
जामनगर की रिफाइनरी का दौरा क्यों करेंगे मार्को रुबियो?
मार्को रुबियो के कार्यक्रम में गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी का दौरा भी शामिल बताया गया है. यह रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल के प्रसंस्करण के लिए एक प्रमुख केंद्र है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रुबियो 21 अक्टूबर को यहां कुछ घंटे बिता सकते हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिका के टेक्सास में एक बड़ी रिफाइनरी परियोजना में निवेश कर रही है. इसे पिछले पांच दशकों में अमेरिका में अपनी तरह की पहली नई रिफाइनरी परियोजना बताया गया है. इसके अलावा, कंपनी वेनेजुएला से भी बड़ी मात्रा में तेल खरीदती रही है, जिसकी बिक्री पर ट्रंप प्रशासन का नियंत्रण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऐसे में जामनगर का दौरा ऊर्जा व्यापार और तेल आपूर्ति से जुड़े व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मुंबई में बैठक को लेकर राजनयिक बयान पर विवाद
रुबियो की यात्रा से पहले भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की एक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया. विपक्ष ने उनकी उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को उम्मीद थी कि जयशंकर, रुबियो से मुलाकात के लिए मुंबई में मौजूद रहेंगे. इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले एक दशक से भारत विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी केवल राजधानी दिल्ली तक सीमित नहीं रखता, बल्कि देश के अन्य शहरों में भी ऐसी बैठकें आयोजित करता रहा है. मुंबई में होने वाली यह मुलाकात भी इसी व्यापक राजनयिक परंपरा के संदर्भ में देखी जा रही है.
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