भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसमें अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के गिरोह डी-कंपनी को भारत में मौजूद अपराधी संगठन बताया गया था।
भारत ने बुधवार को कहा कि यह बात गलत है और इससे साबित करती हुई कोई जानकारी रिपोर्ट में नहीं दी गई। भारत ने कही कि ऐसी गलतियों से संयुक्त राष्ट्र की छवि को नुकसान पहुंचता है।
रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारी पर चीन से पैसे लेने का आरोप
यह रिपोर्ट बेन सॉल ने जुलाई 2026 में तैयार की थी। इसे अक्टूबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान पेश किया गया था।
बेन सॉल ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर हैं। उन्हें मिलने वाली आर्थिक मदद को लेकर भी सवाल उठे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर नजर रखने वाले यूएन वॉच ने मई 2026 में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि चीन की सरकार ने 2024 में सॉल को 1.5 लाख डॉलर दिए थे। रिपोर्ट में चीन को उनका सबसे बड़ा आर्थिक मददगार बताया गया।
भारत बोला- दाऊद 1993 से वांटेड, देश छोड़कर भागा
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति की बैठक में बुधवार को भारत के प्रतिनिधि रघु पुरी ने यह मुद्दा उठाया।
भारत ने रिपोर्ट के उस हिस्से पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2003 में अल-कायदा से संबंधों के कारण भारत में मौजूद डी-कंपनी के सरगना को अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल किया था।
रघु पुरी ने कहा कि डी-कंपनी को भारत में मौजूद संगठन बताने से लोगों के सामने गलत तस्वीर जाती है।
दाऊद इब्राहिम और उसका गिरोह 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामले में भारत में वांटेड हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में भी दाऊद से जुड़ी जानकारी दी गई है।
पुरी बोले- दाऊद के भारत छोड़ने की बात रिपोर्ट में नहीं
पुरी ने कहा कि दाऊद 2003 में संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल किए जाने से काफी पहले भारत छोड़ चुका था। इसके बाद विदेश में रहते हुए उसे अल-कायदा और उसके सरगना ओसामा बिन लादेन से संबंधों के कारण सूची में डाला गया था।
पुरी के मुताबिक, रिपोर्ट में इस अहम जानकारी का जिक्र नहीं किया गया। ऐसी लापरवाही संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन को नुकसान पहुंचाती है।
भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की सूची में दाऊद के रहने की जगह के बारे में जो जानकारी दी गई है, वह उस देश की ओर इशारा करती है जहां ओसामा बिन लादेन मिला था और मारा गया था। यह पाकिस्तान का संदर्भ था। बिन लादेन को 2011 में अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था।
भारत बोला- आतंकवाद को मानवाधिकारों की आड़ में सही नहीं ठहरा सकते
रघु पुरी ने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश अब मानवाधिकारों और आतंकवाद से निपटने के नियमों का सहारा लेकर अपने कामों को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों के नाम पर आतंकवाद फैलाने वालों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वालों को बचाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों पर रिपोर्ट तैयार करने वाले विशेष अधिकारी कई बार गलत जानकारी के आधार पर रिपोर्ट जारी कर देते हैं। इसके बाद भी उनसे जवाब नहीं मांगा जाता।
पुरी ने कहा कि इससे सदस्य देशों के सामने मुश्किल खड़ी होती है। गलत जानकारी वाली रिपोर्ट जारी होने के बाद उसे सुधारने की गुंजाइश कम रह जाती है। इससे पहले भी भारत ऐसी रिपोर्टों के फैक्ट्स में गलतियों पर चिंता जता चुका है।
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