अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कथित झड़प की घटनाओं को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर हमला बोला। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने चीन के सामने सरेंडर कर दिया है और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया है।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, “जब बहादुरी के कामों को कोई मान्यता नहीं मिलती और शहादत को सम्मान नहीं दिया जाता, तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि अधिकारी अब खुलकर बोल रहे हैं। यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी महानिदेशकों के एक सम्मेलन में ऐसी ही बात उठी थी- खास तौर पर यह कि हमने 65 पेट्रोलिंग पॉइंट्स में से 26 पर अपना नियंत्रण खो दिया है। वे अब हमारे कंट्रोल में नहीं हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है। अधिकारियों को बार-बार बोलने के लिए मजबूर होना पड़ता है- अक्सर अपने बहादुर जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए क्योंकि सरकार जानबूझकर इन बातों से आंखें मूंद लेती है।”
कांग्रेस का सरकार पर हमला तब आया जब ITBP प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर ने चीन को लेकर बड़ा बयान दिया। कपूर ने गुरुवार को कहा था कि ITBP की नवगठित शौर्य कमांडो यूनिट ने अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ जारी टकराव के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।
कपूर के मुताबिक, ITBP अपनी युद्धक तैयारियों को मजबूत कर रहा है। इसके तहत विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो को सीमा पर तैनात प्रत्येक बटालियन में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बल की तैयारियों को मजबूत करने के लिए आधुनिकीकरण अभियान भी चलाया जा रहा है। इसमें विशेष प्रशिक्षण और युद्ध की उभरती तकनीकों पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
पवन खेड़ा ने कहा, “यह हैरान करने वाली बात है। चीन की हरकतें अब सबके सामने आ चुकी हैं… सरकार का हाल यह है कि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि क्या जवाब दें या कैसे प्रतिक्रिया दें… चीन के सामने प्रधानमंत्री की इस कायरता के पीछे क्या राज है? जब आप मुख्यमंत्री थे, तब आप चार बार चीन गए थे- क्यों? इसके अलावा, तब से आप छह बार और चीन जा चुके हैं, और प्रधानमंत्री के तौर पर आप उनसे 23 या 24 बार मिल चुके हैं। फिर भी, आपने एक बार भी लद्दाख का मुद्दा नहीं उठाया; एक बार भी अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा नहीं उठाया… वे आपके खिलाफ किस तरह के राज छिपाए हुए हैं?”
उन्होंने आगे कहा, “हमने उनकी (चीन की) हर एक शर्त मान ली है- ऐसा नहीं है कि हमने किसी शर्त को ठुकराया हो। हम उनकी शर्तें मानते रहे, फिर भी हमें सजा मिलती रही और हम हमलों का सामना करते रहे। हमने उनकी शर्तें मान लीं; और इस बीच, हमारा व्यापार घाटा 99 अरब डॉलर से बढ़कर 112 अरब डॉलर हो गया है। हम बस उनके सामने झुकते ही जा रहे हैं। हमने यात्रा प्रतिबंध हटा दिए और उनके लिए वीजा की संख्या बढ़ा दी… हमने ‘प्रेस नोट 3’- जो कि एक बहुत महत्वपूर्ण नीति है उसमें भी बदलाव कर दिया, सिर्फ इसलिए क्योंकि चीन चाहता था कि भारत उसके द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दे। लेकिन बदले में हमें क्या मिला?…”
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात का जिक्र किया। पार्टी ने कहा कि सीमा पर भारतीय सैनिकों के सामने तनाव की खबरों के बीच प्रधानमंत्री चीनी राष्ट्रपति के साथ हंसी-मजाक करते नजर आए।
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कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में लिखा कि चीन के प्रति सख्त रुख अपनाने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में शी जिनपिंग के साथ हंसी-मजाक करते दिखाई दिए। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि जुलाई से चीनी सैनिकों के साथ झड़पों की खबरों को दबाया जा रहा है। कांग्रेस ने इस संबंध में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर का वीडियो भी साझा किया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी अरुणाचल प्रदेश में हालिया टकराव की खबरों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन के प्रति भारत की ओर से लगातार रियायतें दिए जाने के बीच प्रधानमंत्री और उनका प्रतिष्ठान इन घटनाओं पर चुप है।
रमेश ने एक्स पर लिखा कि ITBP के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ हालिया टकराव के दौरान बल के प्रदर्शन की सराहना की है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री और उनके प्रतिष्ठान की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि स्थानीय निवासियों ने अरुणाचल प्रदेश में गश्त से जुड़े कुछ बिंदुओं पर भारत का नियंत्रण खोने की बात कही है। रमेश ने इसकी तुलना लद्दाख में हुए घटनाक्रम से की।
जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया। इसके साथ ही उन्होंने वहां 60,000 मेगावाट क्षमता के एक बांध के निर्माण से जुड़ी खबरों का जिक्र किया। कांग्रेस नेता ने इन घटनाक्रमों को भारत की पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए संभावित जोखिम बताया।
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