Yuvraj Singh
Date: 25-10-26 17:56
उत्तर प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर 26 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है. इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है. जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कानपुर के बिठूर पहुंचेंगे, जहां वह महर्षि वाल्मीकि आश्रम में रामायण पाठ और पूजा-अर्चना में शामिल होंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. साथ ही, बिल्हौर और बिठूर विधानसभा क्षेत्रों के लिए 411 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे. कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी किया जाएगा.
बिठूर के वाल्मीकि आश्रम का है खास धार्मिक महत्व
बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम का रामायण से गहरा संबंध माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी और माता सीता ने आश्रय लिया था. मान्यता यह भी है कि भगवान श्रीराम के पुत्र लव और कुश का जन्म इसी स्थान पर हुआ था. यही वजह है कि वाल्मीकि जयंती पर इस आश्रम में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया जाता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यात्रा के दौरान पूजा-पाठ के साथ क्षेत्र में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे.
रामायण सर्किट के जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से विकसित करने पर जोर दे रही है. इसी उद्देश्य से रामायण सर्किट और राम वन-गमन पथ के अंतर्गत अयोध्या, चित्रकूट और इटावा समेत रामायण से जुड़े विभिन्न स्थलों पर विकास कार्य कराए जा रहे हैं. सरकार का लक्ष्य इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनकी ऐतिहासिक पहचान को सहेजना है. महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थलों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए भी विभिन्न परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके.
पर्यटन मंत्री ने बताया सरकार का प्लान
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक, प्रदेश में रामायण से जुड़े कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल मौजूद हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार रामायण सर्किट और राम वन-गमन पथ के जरिए इन स्थलों के विकास, संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है. चित्रकूट में हो रहे विकास कार्य इस पहल का उदाहरण हैं. सरकार का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि की विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना भी है. वाल्मीकि समुदाय महर्षि वाल्मीकि जयंती को ‘प्रकट दिवस’ के रूप में मनाता है. 26 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रमों के जरिए उनकी शिक्षाओं और योगदान को याद किया जाएगा.
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