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हरियाणा के फरीदाबाद से एक भावुक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है. यहां सड़क हादसे में अपनी मां मीरा देवी को खोने के बाद उनके बेटों ने ऐसा फैसला लिया, जिससे उनकी मां के अंग दूसरे लोगों की जिंदगी बचाने में मदद कर सकेंगे. मां की मौत के गहरे दुख के बीच परिवार ने उनके अंगदान की इच्छा जताई. इसके बाद बादशाह खान सिविल अस्पताल में अंगदान की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए दिल्ली स्थित एम्स से डॉक्टरों की विशेष टीम बुलाई गई. मीरा देवी के बेटे शुभम ने परिवार की सहमति से यह फैसला लिया. परिवार चाहता था कि उनकी मां के अंग किसी जरूरतमंद व्यक्ति के काम आ सकें और उनके जरिए किसी दूसरे को नया जीवन मिल सके. इस इच्छा की जानकारी फरीदाबाद के सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा को मिली तो उन्होंने बिना देर किए दिल्ली एम्स की टीम से संपर्क किया. इसके बाद विशेष मेडिकल टीम फरीदाबाद पहुंची और चिकित्सीय प्रक्रिया के तहत अंगदान की कार्रवाई पूरी की गई.
परिवार के मुताबिक, 16 अक्टूबर को हुए सड़क हादसे में मीरा देवी को गंभीर चोटें आई थीं. उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हादसे के बाद परिवार उनकी सेहत को लेकर चिंतित था. हालांकि, 24 अक्टूबर को जब मीरा देवी घर पर थीं, तब उनकी तबीयत फिर बिगड़ने लगी. इसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे. लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिवार के लिए यह बेहद दुखद समय था. मां को खोने के बाद घर में शोक का माहौल था, लेकिन इसी बीच बेटों ने अंगदान का फैसला लेकर एक ऐसा कदम उठाया, जिससे उनकी मां के अंग दूसरों के काम आ सकें. परिवार ने अस्पताल में बताया कि वे मीरा देवी के अंग दान करना चाहते हैं. उनकी इच्छा थी कि मां के अंग किसी दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने में मदद कर सकें. परिवार के इस फैसले के बाद अस्पताल प्रशासन ने अंगदान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई.
बेटों की इच्छा पर दिल्ली एम्स से बुलाई गई टीम
फरीदाबाद के सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद उनके बेटों ने मां के अंगदान की इच्छा जताई. डॉ. आहूजा के मुताबिक, जैसे ही उन्हें परिवार के इस फैसले की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत दिल्ली एम्स की विशेष मेडिकल टीम से संपर्क किया. टीम को फरीदाबाद बुलाया गया, ताकि अंगदान की प्रक्रिया पूरी की जा सके. एम्स की टीम बादशाह खान सिविल अस्पताल पहुंची और चिकित्सीय प्रक्रिया के तहत अंगदान की कार्रवाई संपन्न की. सिविल सर्जन ने कहा कि दुख की इस घड़ी में बेटों का यह फैसला सराहनीय है. मां को खोने के बाद भी उन्होंने दूसरों की जिंदगी के बारे में सोचा और उनके अंगदान की इच्छा जताई. उन्होंने एम्स की टीम का भी धन्यवाद किया कि सूचना मिलने के बाद टीम समय पर फरीदाबाद पहुंची और प्रक्रिया पूरी की जा सकी.
मां के जाने के बाद भी दूसरों के काम आएंगे उनके अंग
मीरा देवी के बेटों के इस फैसले ने अंगदान के महत्व को एक बार फिर सामने रखा है. मां की मौत के बाद परिवार ने उनके अंगों को दान करने का फैसला किया, ताकि वे दूसरों के जीवन में मददगार बन सकें. इसके लिए परिवार ने अस्पताल प्रशासन को अपनी इच्छा बताई और डॉक्टरों की टीम ने प्रक्रिया पूरी की. इस पूरे मामले में बेटे शुभम और परिवार की सहमति अहम रही. सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने भी उनके साहसिक कदम की सराहना की. उन्होंने कहा कि परिवार का यह फैसला दूसरे लोगों के लिए प्रेरणादायक है. बादशाह खान सिविल अस्पताल में हुई इस प्रक्रिया के बाद मीरा देवी के परिवार का दुख कम नहीं हो सकता, लेकिन उनके अंगदान के फैसले से दूसरों को जीवन की नई उम्मीद मिल सकती है. एक मां को खोने के बाद उसके बेटों ने अपनी पीड़ा के बीच ऐसा निर्णय लिया, जो जरूरतमंद लोगों के लिए मददगार साबित हो सकता है.
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