महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में पांच में से सिर्फ दो सीटें जीतने के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की हार के बाद पार्टी के नेताओं ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर सहयोगियों का साथ नहीं देने का आरोप लगाया है। वहीं, शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा है।
दरअसल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गृह क्षेत्र नागपुर में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हरा दिया। इस नतीजे के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा है। चुनाव परिणाम आने से पहले कांग्रेस की ‘जीरो सीट’ को लेकर तंज कसने वाले बीजेपी नेताओं को नागपुर में हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने हार का ठीकरा शिंदे सेना पर फोड़ा है।
महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर हुए चुनाव में विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) ने तीन सीटें जीतीं, जबकि सत्तारूढ़ महायुति को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने एक-एक सीट जीती। वहीं, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) ने दो सीटों पर कब्जा जमाया।
नागपुर डिवीजन की स्नातक निर्वाचन सीट पर कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी ने जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार और पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराया। इस सीट पर मतगणना मंगलवार सुबह शुरू हुई थी और गुरुवार तड़के तक चली। वोटों की गिनती 40 घंटे से अधिक समय तक जारी रही। वंजारी को 67,231 वोट मिले, जबकि कोहले के खाते में 63,960 वोट आए।
नागपुर को बीजेपी का पारंपरिक गढ़ माना जाता रहा है। यह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। दोनों नेताओं ने कोहले के समर्थन में प्रचार किया था। ऐसे में यहां कांग्रेस की जीत को बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। गडकरी जुलाई 1990 से मई 2014 तक करीब 24 वर्षों तक नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के सदस्य रहे थे।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी की हार के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में आ गया। फडणवीस ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए उसे ‘बिग फैट जीरो’ बताया था। हालांकि, कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी की जीत के बाद मुख्यमंत्री ने यह पोस्ट डिलीट कर दी।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने फडणवीस के एक डिलीट किए गए सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इस पोस्ट में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को ‘बिग फैट जीरो’ बताया गया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूरे नतीजे आने से पहले ही फडणवीस ने पोस्ट कर दी थी, लेकिन नागपुर में कांग्रेस की जीत के बाद उन्हें इसे हटाना पड़ा।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि फडणवीस ने पोस्ट डिलीट करके एक बार फिर सावरकर की विरासत को बचाया है। पार्टी ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की जनता 2029 के चुनाव में बीजेपी को झटका देगी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी नागपुर में बीजेपी की हार को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सीटों को लेकर बनाया गया भ्रम अंतिम नतीजों के बाद टूट गया।
संजय राउत को भी मिला मौका
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फडणवीस की सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का मज़ाक उड़ाना प्रधानमंत्री के पद के अनुरूप नहीं है। मराठी मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, राउत ने कहा, “सोशल मीडिया पर आकर देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का मजाक उड़ाना बचकाना हरकत है।” उन्होंने नागपुर के नतीजों को लेकर भी भाजपा पर तंज कसा और कहा कि ग्रेजुएट्स ने पार्टी को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।
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महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव के नतीजों में अलग-अलग दलों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में NCP-SP की हर्षदा देशमुख-जाधव ने बीजेपी की स्मिता जाधव को हराया। वहीं, पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के कौस्तुभ गावड़े जीते। अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना के किरण सरनाईक ने जीत दर्ज की। इन नतीजों के साथ विपक्षी महाविकास अघाड़ी को पांच में से तीन सीटें मिलीं, जबकि सत्तारूढ़ महायुति के खाते में दो सीटें आईं।
महाराष्ट्र MLC चुनाव के नतीजों में हार के बाद, बीजेपी ने अपने सहयोगी दल- एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर निशाना साधा है। बीजेपी का आरोप है कि अहम निर्वाचन क्षेत्रों में शिवसेना ने बीजेपी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को जरूरी समर्थन नहीं दिया।
बीजेपी प्रवक्ता और कॉरपोरेटर नवनाथ बान ने कहा कि पुणे और नागपुर में शिवसेना ने अपने सहयोगियों को वैसी मदद नहीं दी, जैसी उम्मीद थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुणे में आखिरी मौके पर शिवसेना द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को समर्थन देने से ‘महायुति’ की एकता को नुकसान पहुंचा है। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर में महाराष्ट्र के मंत्री अब्दुल सत्तार ने NCP के खिलाफ प्रचार किया।
बान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों के दौरान, हमारे सहयोगी दल शिवसेना ने पुणे और नागपुर में वैसी मदद नहीं की, जैसी उम्मीद थी। पुणे में आखिरी मौके पर सचिन सनाप का समर्थन करके, शिवसेना ने महायुति की एकता को झटका दिया। उन्हें मिले वोट भाजपा उम्मीदवार को नहीं मिल सके। छत्रपति संभाजीनगर में, अब्दुल सत्तार ने सीधे तौर पर एनसीपी के खिलाफ प्रचार किया, जिससे भी गठबंधन पर असर पड़ा।”
उन्होंने कहा, “अगर शिवसेना ने महायुति गठबंधन के सिद्धांतों का पालन किया होता और भाजपा तथा एनसीपी का समर्थन किया होता, तो गठबंधन पांचों सीटें जीत सकता था। लेकिन, पुणे में एक सीट पाने की कोशिश में, शिवसेना ने अपने सहयोगियों को मुश्किल स्थिति में डाल दिया और गठबंधन के हाथ से तीन सीटें जीतने का मौका निकल गया।”
बीजेपी नेता केशव उपाध्ये ने भी चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मिलकर चुनाव लड़ने पर पांचों सीटें जीतने की संभावना थी, तो गठबंधन सिर्फ दो सीटों पर ही क्यों सिमट गया। उपाध्ये ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पांच सीटों के नतीजों के बाद क्या महायुति आत्ममंथन करेगी? उन्होंने गठबंधन की चुनावी रणनीति की समीक्षा करने की जरूरत बताई।
चुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवार की हार के बाद NCP नेता प्रफुल्ल पटेल ने संगठन की प्राथमिकताओं और ढांचे की तत्काल समीक्षा करने की जरूरत बताई। उन्होंने पार्टी में भरोसा बहाल करने और संगठन को मजबूत बनाने के लिए आत्ममंथन की बात कही। महाराष्ट्र की 78 सदस्यीय विधान परिषद में बीजेपी 35 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। शिवसेना के 12 और NCP के 10 सदस्य हैं। विपक्ष में कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के पांच-पांच सदस्य हैं, जबकि NCP-SP के दो सदस्य हैं। परिषद में चार निर्दलीय सदस्य भी हैं।
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