Gorakhpur News: जहां जन्म या मृत्यु हुई, उसी क्षेत्र के मजिस्ट्रेट से लेना होगा आदेश – Hindustan

Gorakhpur News: राजीव दत्त पाण्डेय गोरखपुर। जन्म या मृत्यु की घटना के दो साल बाद पंजीकरण कराना है तो अब उसी क्षेत्र के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश लेना होगा, जहां जन्म या मृत्यु हुई है। दूसरे क्षेत्र के मजिस्ट्रेट का आदेश मान्य नहीं होगा। मजिस्ट्रेट संबंधित घटना की वास्तविकता और अभिलेखों की सत्यता की जांच के बाद ही पंजीकरण की अनुमति देंगे। जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में हुए इस संशोधन के अनुपालन के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों और संबंधित न्यायिक अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। फिलहाल गोरखपुर में बदली प्रक्रिया के कारण करीब पांच हजार जन्ममृत्यु के आवेदन जमा नहीं हो पा रहे हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, परिवार न्यायालयों के प्रधान न्यायाधीशों और संबंधित न्यायिक अधिकारियों को संशोधित कानून की प्रति भेजकर आवश्यक अनुपालन के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट की ओर से 27 अक्तूबर को जारी पत्र में जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में किए गए संशोधन की जानकारी दी गई है। भारत सरकार के 06 अगस्त 2026 को प्रकाशित असाधारण राजपत्र के माध्यम से पंजीकरण अधिनियम की धारा 13 में जरूरी बदलाव किए गए हैं। संशोधित धारा 13 की उपधारा (3ए) के अनुसार, जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष बाद दी गई सूचना पर पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से ही किया जा सकेगा। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने प्रदेश के सभी संबंधित न्यायिक अधिकारियों तक संशोधित अधिनियम और राजपत्र की प्रति पहुंचाने और उसके अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने को कहा है। इसकी प्रतिलिपि लखनऊ स्थित न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक को भी सूचना के लिए भेजी गई है।
-दो साल बाद जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए एक अक्तूबर से बदला नियम
-प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सत्यापन के बाद ही होगी प्रक्रिया पूरी
-हाईकोर्ट ने गोरखपुर समेत सूबे सभी जिला जजों और न्यायिक अधिकारियों को भेजा पत्र
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