नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। दूरसंचार नियामक ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों के बीच कॉल और नेटवर्क कनेक्शन से जुड़े नियमों में जरूरी बदलाव किए हैं। इसके तहत कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से पुरानी व्यवस्था से आधुनिक आईपी आधारित नेटवर्क पर जाना होगा। इससे बार-बार कॉल कटने (कॉल ड्रॉप) की समस्या से मुक्ति मिलने और कॉल तेजी से कनेक्ट होने की उम्मीद है। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। ट्राई ने इसके लिए ‘दूरसंचार इंटरकनेक्शन विनियम-2026’ में संशोधन जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य पुराने नेटवर्क ढांचे को आधुनिक तकनीक से बदलना है। वर्तमान में लागू ई1/टीडीएम आधारित पुराने इंटरकनेक्शन को अगले तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह से आधुनिक आईपी आधारित इंटरकनेक्शन में बदला जाएगा। ई-टीडीएम टेलीकॉम कंपनियों के बीच फोन कॉल पहुंचाने की एक पुरानी तकनीकी है। यह डिजिटल टेलीकॉम लाइन है, जिसकी कुल क्षमता 2.048 मेगाबिट प्रति सेकंड होती है। नए नियम लागू होने के बाद स्थापित होने वाले सभी नए इंटरकनेक्शन अनिवार्य रूप से आईपी आधारित ही होंगे। इस प्रणाली से नेटवर्क की लेटेंसी (कॉल लगने में देरी) कम होगी, कॉल की गुणवत्ता बेहतर होगी और नेटवर्क का प्रबंधन बेहतर हो सकेगा।
मोबाइल ग्राहकों को कैसे फायदा
1. कॉल जल्दी कनेक्ट होगी : जब ग्राहक किसी दूसरे नेटवर्क पर कॉल मिलाते हैं, तो रिंग जाने में कुछ सेकंड का समय लगता है या कॉल बीच में ही कट जाती है। नई व्यवस्था से कॉल लगने में लगने वाला समय (लेटेंसी) काफी घट जाएगा।
2. आवाज स्पष्ट आएगी : कॉल के दौरान बार-बार आवाज कटने की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी और बातचीत के दौरान आवाज की स्पष्टता काफी बेहतर होगी।
3. नेटवर्क जाम नहीं होगा: नए ढांचे के तहत टेलीकॉम कंपनियां एक साथ ज्यादा कॉल्स संभाल सकेंगी। दीवाली या नए साल जैसे त्योहारों पर जब पूरा देश एक साथ कॉल करता है और नेटवर्क जाम हो जाता है, उस समस्या में अब काफी कमी आएगी।
कनेक्शन हटाने के लिए अलग नियम
ट्राई ने इंटरकनेक्शन प्वाइंट (पीओआई) को स्वेच्छा से हटाने के लिए अलग व्यवस्था बनाई है। पहले नियमों में मुख्य रूप से कनेक्शन काटने का प्रावधान था। अब किसी कंपनी को अपनी जरूरत के अनुसार कनेक्शन छोड़ने की सुविधा के लिए स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है। ऐसा किसी क्षेत्र में सेवा बंद करने, कॉल की संख्या घटने या कॉल का रास्ता बदलने जैसी स्थितियों में किया जा सकेगा। नए नियमों में बैंक गारंटी की व्यवस्था को बरकरार रखा गया है। हालांकि, दोबारा आकलन के बाद जमा बैंक गारंटी की वैधता और उसकी समीक्षा की अवधि छह महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है। इंटरकनेक्शन प्वाइंट के लिए बैंक गारंटी की अधिकतम सीमा तय करने की पद्धति में भी बदलाव किया गया है।
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देर से भुगतान पर ब्याज देना होगा
इंटरकनेक्शन शुल्क का भुगतान देर से करने पर ब्याज लगाने का प्रावधान किया गया है। ब्याज की दर टेलीकॉम कंपनियां आपसी सहमति से तय करेंगी, लेकिन यह भारतीय स्टेट बैंक की एक साल की एमसीएलआर दर से दो प्रतिशत अधिक की सीमा से ऊपर नहीं हो सकती। पुरानी इंटरकनेक्शन व्यवस्था से नए सेवा क्षेत्र आधारित कनेक्शन पर जाने और आईपी आधारित नेटवर्क अपनाने की प्रगति की निगरानी की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर आर्थिक दंड लगाने के लिए अलग-अलग स्तर की व्यवस्था बनाई गई है।
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