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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि राज्य और समाजों के लिए आत्मनिरीक्षण बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि देश और धर्म के प्रति निष्ठा से समझौता नहीं होना चाहिए. हमें अपने दिमाग को कैद नहीं होने देना चाहिए. अगर आत्मनिरीक्षण नहीं करते हैं तो समय और दिशा दोनों खो देते हैं.
एक कार्यक्रम के दौरान अजीत डोभाल ने कहा कि राज्य और धर्म के बीच संघर्ष कोई नई बात नहीं है, अब्बासी शासन (Abbasid Rule) के दौरान राज्य और धर्म के बीच संतुलन स्पष्ट था, लेकिन यह संघर्ष हमेशा बना रहेगा. उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण ये है कि क्या हम इसका समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं.
अजीत डोभाल ने हिंदू परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि धर्म-आधारित संघर्षों को शास्त्रार्थ और ध्यान के माध्यम से हल किया गया. उन्होंने कहा कि धर्म और विचारधाराएं प्रतिस्पर्धी होती हैं, अगर वे प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगी, तो वे ठहराव का शिकार हो जाएंगी और अंततः नष्ट हो जाएंगी. वे पीढ़ियां जो बॉक्स से बाहर नहीं सोच सकती थीं, वे स्थिर हो गई हैं.
डोभाल ने कहा कि विचारों के प्रवाह को बाधित करने से समाज ठहराव की ओर बढ़ता है. उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि प्रिंटिंग प्रेस को अपनाने का विरोध इस बात का प्रमाण है कि किस तरह धार्मिक नेताओं ने इसे इस डर से रोका कि इससे इस्लाम की व्याख्या उनकी मान्यताओं के अनुसार नहीं होगी.
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