डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे लोग करते हैं ये काम, कम वेतन… पहचान छुपाना और चुप रहना जरूरी! – Aaj Tak

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डोनाल्ड ट्रंप सत्ता संभालते ही, अवैध प्रवासियों पर कहर बनकर टूटे हैं. अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहे लोगों को लगातार  वापस भेजा जा रहा है. लेकिन जिस तरीके से भेजा जा रहा है, उसको लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. दरअसल, अमेरिका में अवैध प्रवासी घोषित किए गए 104 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेज दिया गया है. अमेरिका से निर्वासित किए गए 104 भारतीय प्रवासियों को लेकर अमेरिकी सैन्य विमान सी-17 ग्लोबमास्टर बुधवार दोपहर अमृतसर पहुंच गया. 
 
बता दें, नागरिकता कानून पर ट्रंप सरकार बेहद सख्त रूप अपनाए हुए है. जिसके बाद अमेरिका में रह रहे 14 लाख अवैध प्रवासी भारतीयों पर निर्वासन की तलवार लटक रही है. लेकिन सवाल उठ रहा है कि ये लोग कैसे अमेरिका पहुंचे, और वहां क्या कर रहे थे? 
ये लोग अमेरिका पहुंचे कैसे? इस सवाल का सीधा जवाब है कि ये सभी गलत रास्ते से अमेरिका पहुंचे थे, जो कि कानूनी रूप से वैध नहीं है. इनके अमेरिका पहुंचने के रूट दोनों देशों के कानून के खिलाफ है. ये तो साफ है कि अगर कोई भी किसी देश में अवैध रूप से रहता है, उसपर कानूनी कार्रवाई जायज है. लेकिन अब अवैध रूप से रह रहे भारतीयों को अमेरिका से वापस आने के बाद डंकी रूट की खूब चर्चा हो रही है. 
अब सबसे पहले जानते हैं कि ये डंकी रूट क्या है?
डंकी रूट एक ऐसा रास्ता होता है, जो कई देशों से होकर गुजरता है. यानी अगर किसी भारतीय को अवैध रूप से अमेरिका जाना है, तो वो किसी ओर देश से होते हुए अमेरिका पहुंचता है, इसी रास्ते डंकी रूट कहा जाता है. विदेश भागने वाले लोग अनाधिकृत रूप से इस रूट का उपयोग करते हैं. डंकी रूट के माध्यम से लोग ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा जैसे यूरोपीय देशों में पहुंचते हैं. डंकी रूट में कई बार मंजिल तक पहुंचने में महीनों लग जाते हैं. इसके लिए अवैध तरीके से ट्रक, विमान या नाव, पैदल चलकर या जंगलों के रास्ते एक देश से दूसरे देश जाते हैं. पंजाब, हरियाणा, गुजरात और साउथ के कुछ राज्यों के लोग डंकी रूप से कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में दाखिल होते हैं. 
ये रास्ते से कानूनी तौर पर अवैध है. इसलिए इसमें खतरा भी काफी है. कई बार लोगों की मौत भी हो जाती है. ये रूट सबसे ज्यादा खतरनाक इसलिए होता है, क्योंकि इसमें कई देशों की सीमाओं को पार करना होता है. ऐसे में कई बार सीमा पर तैनात जवान अवैध तरीके से घुसपैठ करने वाले लोगों को गोली मार देते हैं. वहीं कुछ मामलों में लोग भीषण ठंड या फिर भूख से भी दम तोड़ देते हैं.
चल रहा है बड़ा रैकेट
अब सवाल उठता है कि कोई तो होगा, जो इन लोगों को डंकी रूट से अमेरिका जैसे देश तक पहुंचा देते हैं. दरअसल, जानकार बताते हैं कि डंकी रूट से लोगों को विदेश ले जाने का एक बड़ा रैकेट चल रहा है. जिसमें कई ट्रैवल एजेंसियां भी शामिल रहती हैं. डंकी रूट अवैध रास्ता है, इसलिए इसके जरिये एजेंट और ट्रैवल एजेंसियों की अवैध कमाई भी होती है. कई लोग तो डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने में लाखों खर्च कर देते हैं, 50 से 60 लाख रुपये तो आम बात है. रिपोर्ट्स की मानें तो इस गिरोह के एजेंट्स मैक्सिको या फिर कनाडा की सीमा से होते हुए लोगों को अमेरिका में दाखिल करवाते हैं. 
आइए जानते हैं कि जो लोग डंकी रूट से अमेरिका पहुंचते हैं, तो वहां जाकर क्या काम करते हैं? ये तो साफ है कि पैसा कमाना एकमात्र मकसद होता है. लेकिन कौन-सा ऐसा काम करते हैं, जिसके लिए लोग जान जोखिम में डाल देते हैं. अवैध रूप से वही लोग विदेश पहुंचते हैं तो सीधे रास्ते से जाने के लिए दस्तावेज नहीं बनवा पाते हैं, या फिर उन्हें इजाजत नहीं मिलती है.
डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने वाले अधिकतर कम पढ़े-लिखे होते हैं, Unskilled होने वजह से काम भी वो Unskilled वाले ही विदेशों में करते हैं. अधिकतर लोग रेस्टोरेंट में हेल्पर जैसा बर्तन धान, घरों में हेल्पर- बच्चों का देखभाल करना, मवेशियों की देख-रेख, छोटी-छोटी दुकानों में हेल्पर, गाड़ी क्लीनिंग, पेट्रोल पंप, कंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूरी, गोदामों में पैकेजिंग और लेबर के काम करते हैं, इसके अलावा अंडरग्राउंड जॉब्स में ऐसे लोग लगे रहते हैं. क्योंकि ऐसे काम के लिए उनसे डॉक्यूमेंट नहीं मांगे जाते हैं.
कम वेतन… ज्यादा काम
 
हालांकि इस काम के लिए डंकी रूट से पहुंचने वाले भारतीयों को अमेरिकी लोग के मुकाबले करीब आधा वेतन ही मिलता है, क्योंकि इनको रखने वालों को भी पता होता है कि ये अवैध रूप से देश में रह रहे हैं, इसलिए वो कम वेतन ऑफर करते हैं, उन्हें भी इनकी पहचान छुपानी होती है, दोनों की रजामंदी से ऐसे लोगों अमेरिका में वर्षों तक टिके रहते हैं. एक अनुमान के मुताबिक इस तरह से काम में लगे लोग 50 से 60 लाख रुपये सालाान कमा लेते हैं. जबकि इसी काम के लिए अमेरिकी लोग सालाना 1.25 करोड़ रुपये से ज्यादा लेते हैं. डंकी रूट वालों को कम वेतन देकर ज्यादा काम लिया जाता है और वो ये सब करने को मजबूत होते हैं.
डंकी रूट पहुंचने वाले कमाई नकद में होती है, और पहचान छिपी रहती है, अवैध रूप से अमेरिका में रहने वाले लोग ऐसी जगहों पर रहते हैं, जहां पुलिस का आना जाना कम होता है. क्योंकि अवैध तरीके से अमेरिका पहुंचना जितना मुश्किल होता है, वहां टिके रहना उससे भी बड़ा संघर्ष का काम होता है. काम भी ऐसा करते हैं, जहां पब्लिक डीलिंग कम हो. ये लोग ऐसी जगहों पर जाने से भी बचते हैं, जहां पुलिस या अमेरिकी अधिकारियों की नजरें उन पर पड़ें. अवैध अप्रवासी अमेरिकी सोसाइटी में घुलने-मिलने से बचते हैं. ऐसे लोगों को बैंक अकाउंट खोलना मुश्किल होता है, जिससे वे कैश में लेन-देन करने को मजबूर होते हैं. मेडिकल इमरजेंसी हो जाए तो अस्पताल जाने से डरते हैं, क्योंकि वहां भी डॉक्यूमेंट मांगे जा सकते हैं.
डंकी रूट से रहने वाले लोगों डिपोर्ट होने का डर हमेशा बना रहता है. इमिग्रेशन अधिकारी या पुलिस कभी भी पकड़ सकती है. ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए तमाम देशों की पुलिस लगातार अभियान चलाती है, और कई जगहों पर रेड करती हैं, लोग पकड़े भी जाते हैं.  पकड़े जाने के बाद उन्हें डिटेंशन कैंप में भेज दिया जाता है और फिर डिपोर्टेशन का प्रोसेस शुरू होता है. अमेरिका में ऐसे लोगों की 1 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है. 
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