मेरठ ब्यूरो। सीसीएस यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग ने विश्वविद्यालय को एसपीआरआईएचए (स्कीम फॉर पैडागोगी एंड रिसर्च इन आईपीआरएस फॉर हॉलिस्टिक अवेयरनेस योजना के तहत आईपीआर चेयर (बौद्धिक संपदा अधिकार अध्यक्षता) की स्वीकृति दी है। यह न सिर्फ विश्वविद्यालय बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसकी जानकारी मंगलवार को विश्वविद्यालय में हुई प्रेस कांफ्रेंस में दी गई। जिसमें कुलपति डा।संगीता शुक्ला, शोध निदेशक प्रो। बीरपाल सिंह ने ये जानकारी दी।
शिक्षा और शोध को मिलेगा बल
प्रो। बीरपाल सिंह ने बताया कि इस आईपीआर चेयर के माध्यम से विश्वविद्यालय में छात्रों और शोधार्थियों को अब पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और बौद्धिक संपदा से जुड़े कानूनों व अधिकारों की गहन जानकारी मिलेगी। इससे स्टार्टअप संस्कृति, इनोवेशन और अनुसंधान को नया आयाम मिलेगा। योजना के तहत एक आईपीआर चेयर प्रोफेसर, दो रिसर्च असिस्टेंट, पीएचडी फेलोशिप, पांच साल के लिए, हर साल किताबें, कार्यशालाएं, सेमिनार के लिए यात्रा भत्ते आदि दिए जाएंगे।
वैश्विक स्तर की पहल
कुलपति प्रो। संगीता शुक्ला ने इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के नवाचार और अनुसंधान को वैश्विक मानकों के निकट ले जाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री जयंत सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि,यह चेयर हमारे विद्यार्थियों के लिए एक क्रांतिकारी अवसर है।अब वे अपने आइडिया को सिर्फ सोच तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि उसे पेटेंट कर व्यावसायिक सफलता तक ले जा सकेंगे।
ये होगा बदलाव
विश्वविद्यालय में अब नियमित आईपीआर आधारित सेमिनार, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे। स्टार्टअप्स में रुचि रखने वाले छात्र अपने आइडिया की पेटेंटिंग प्रक्रिया को समझ सकेंगे।शोधार्थियों को रिसर्च प्रोजेक्ट्स, फंडिंग और मार्गदर्शन की सुविधा मिलेगी।नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकारों की संस्कृति को संस्थागत समर्थन मिलेगा।रोजग़ार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
योजना का ये है विजन
बौद्धिक संपदा अधिकारों की शिक्षा और शोध को प्रोत्साहन देना, आईपीआर मामलों में वैश्विक बेस्ट प्रैक्टिसेस का डेटाबेस बनाना, उद्योग-शिक्षा-नीति निर्माताओं के बीच सहयोग और संवाद, भारत की घरेलू आईपीआर फाइलिंग में इज़ाफा करना, अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और शोध साझेदारियों को मजबूती देना, छात्रों को नवाचार के लिए कानूनी और व्यावसायिक मार्गदर्शन मिलेगा।इसके अलावा विश्वविद्यालय को मिलेगा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान, मेरठ में स्थापित होगा बौद्धिक संपदा केंद्र, जिससे एमएसएमई स्टार्टअप्स और युवा उद्यमियों को लाभ होगा।
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