Kedarnath Yatra 2025: पहलगाम हमले का केदारनाथ यात्रा पर कितना असर? श्रद्धालुओं ने बताई हकीकत – aajtak.in

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Kedarnath Yatra 2025: जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के करीब 10 दिन बाद हिमालय की गोद में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट खुले. देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भारी तादाद में दर्शन के लिए केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं. इस पवित्र यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जिस तरह का उत्साह देखा जा रहा है, उससे साफ जाहिर होता है कि आतंकियों के नापाक इरादों का लोगों की धार्मिक आस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. आजतक डिजिटल की टीम ने खुद श्रद्धालुओं से बात की और जाना कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद केदारनाथ आए श्रद्धालुओं में इसका कितना खौफ है.
यूपी के इटावा से साइकिल पर बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचे एक श्रद्धालु गुलशन यादव ने आजतक डिजिटल को बताया कि केदारनाथ यात्रा के दौरान उन्हें किसी तरह का डर नहीं लगा. उन्होंने अकेले ही इस यात्रा का संकल्प लिया है. श्रद्धालु ने कहा कि अगर कोई रास्ते में उनसे धर्म पूछता है तो वह बेबाक होकर कहेंगे कि वो हिंदू हैं. फिर चाहे इसके लिए जान ही क्यों न गंवानी पड़े.
सेना पर लोगों का अटूट भरोसा
राजस्थान के बीकानेर जिले से केदारनाथ आए दो अन्य श्रद्धालुओं ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बावजूद उनके मन में आतंकियों का खौफ नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार और देश की सेना पर पूरा भरोसा है. फिलहाल केदारनाथ धाम में माहौल काफी अच्छा है. वह आनंद के साथ अपनी यात्रा कर रहे हैं.
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के निवासी रितेश शर्मा ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के 10 दिन बाद केदारनाथ के कपाट खुले थे. लेकिन जब उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बारे में सुना तो यात्रा से पहले मन में डर बैठ गया था. केदारनाथ पूरी तरह से पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, इसलिए घरवालों ने भी उन्हें यात्रा पर न जाने की सलाह दी थी. उनके परिजनों ने कहा था कि पहलगाम में भी हमला पहाड़ी इलाके में हुआ था. ऐसे में तुम्हारा जाना ठीक नहीं है. इसके बावजूद मैं बाबा के दर्शन करने निकल पड़ा. हालांकि अभी तक उनका सफर अच्छा रहा है और वह पूरी तरह सुरक्षित हैं.
यूपी के प्रयागराज से बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए पैदल निकले एक साधु ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बावजूद उनके मन में किसी तरह का खौफ नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि मैं तो वैसे भी संन्यासी हूं. डर तो आम जनता के लिए होता है, क्योंकि वह गृहस्थी में फंसे होते हैं. साधुओं को भला क्या डर. साधु तो सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं.
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