Dark Matter News: पिछले साल दो अमेरिकी वैज्ञानिकों- कैथरीन फ्रीज और मार्टिन वोल्फगैंग विंकलर ने एक क्रांतिकारी विचार सामने रखा. उन्होंने कहा कि शायद बिग बैंग के बाद एक और वैसा ही विस्फोट हुआ जिसे ‘डार्क बिग बैंग’ नाम दिया गया है. दावा था कि इस दूसरे विस्फोट के दौरान ही ब्रह्मांड में डार्क मैटर का निर्माण हुआ. कोलगेट यूनिवर्सिटी के दो वैज्ञानिकों- कॉस्मिन इली और रिचर्ड केसी ने उसी दावे केा आगे बढ़ाते हुए एक स्टडी की है. उनका कहना है कि ‘डार्क बिग बैंग’ की संभावना काफी अधिक है. अगर यह थ्योरी सही पाई जाती है तो खगोल विज्ञान के सबसे बड़े रहस्यों में से एक, डार्क मैटर के बारे में काफी कुछ पता लग सकता है.
ब्रह्मांड के बारे में हमारी अब तक की समझ कहती है कि समय की शुरुआत में तीव्र गति से होने वाले विस्तार के दौरान सभी पदार्थ और ऊर्जा का निर्माण हुआ था, जिसे हम ‘बिग बैंग’ कहते हैं. लेकिन 2023 में फ्रीज और विंकलर ने एक नया विचार सामने रखा- दूसरे बिग बैंग का. उनके मुताबिक, इस ‘डार्क बिग बैंग’ के जरिए ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमय चीज ‘डार्क मैटर’ का जन्म होना था.
अब कोलगेट यूनिवर्सिटी के दो वैज्ञानिकों ने डार्क बिग बैंग के इसी कॉन्सेप्ट का विस्तार किया है. इसके अनुसार, डार्क बिग बैंग के कारण ब्रह्मांड में मानक बिग बैंग के साथ ही डार्क मैटर की बाढ़ आ गई होगी, जो प्राथमिक ब्रह्मांडीय निर्माण घटना के एक साल बाद तक जारी रही होगी.
सामान्य पदार्थ और डार्क मैटर एक साथ एक ही तरह से बने होंगे, लंबे समय तक यही माना जाता रहा क्योंकि यही सबसे आसान विचार था. वैज्ञानिकों के लिए डार्क मैटर बेहद परेशानी का सबब है क्योंकि यह प्रकाश या ‘सामान्य’ पदार्थ के कणों संग प्रतिक्रिया नहीं करता. हम अपने आस-पास जो भी देख पाते हैं, वह इन्हीं कणों से बना है. यानी, डार्क मैटर प्रभावी रूप से अदृश्य है.
नॉर्मल मैटर से प्रतिक्रिया न करने की वजह से हम जानते हैं कि डार्क मैटर में जो भी कण होते हैं, वे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन या न्यूट्रॉन नहीं हो सकते, क्योंकि वे प्रकाश और एक-दूसरे के साथ प्रतिक्रिया करते हैं. डार्क मैटर के कण सामान्य कणों से लगभग 5 गुना अधिक भारी होते हैं, जिसका मतलब है कि हर तारा, ग्रह, चंद्रमा, जीवन रूप और भौतिक वस्तु पदार्थ के केवल 15% के लिए जिम्मेदार है. ब्रह्मांड का बाकी 85% पदार्थ डार्क मैटर है.
डार्क मैटर का पता लगाने का इकलौता तरीका गुरुत्वाकर्षण के साथ इसका इंटरएक्शन है. इली के अनुसार, डार्क बिग बैंग सिद्धांत की खूबसूरती यह है कि इस घटना से डार्क मैटर के कण बनेंगे जो गुरुत्वाकर्षण के अलावा नियमित पदार्थ के साथ इंटरएक्ट नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, ‘ऐसे में, यह मॉडल समझा सकता है कि डार्क मैटर का पता लगाने के सभी प्रयास, प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से या कण उत्पादन के माध्यम से, असफल क्यों हुए हैं.’
इली ने कहा कि ‘डार्क मैटर की उत्पत्ति के लिए एक डार्क बिग बैंग परिदृश्य न केवल संभव है, बल्कि शायद विकल्प की तुलना में अधिक संभावित है!’ उन्होंने यह भी बताया कि मूल बिग बैंग और डार्क बिग बैंग किस तरह अलग रहे होंगे.
कोलगेट रिसर्चर्स ने यह भी संकेत दिया कि हम डार्क बिग बैंग के सबूतों की खोज कैसे कर सकते हैं. इसकी चाबी अंतरिक्ष और समय में होने वाली हल्की लहरें हो सकती हैं जिन्हें ‘गुरुत्वाकर्षण तरंगें’ कहा जाता है. ऐसी तरंगों की भविष्यवाणी सबसे पहले 1915 में, अल्बर्ट आइंस्टीन ने की थी.
इली के मुताबिक, ‘डार्क बिग बैंग के पैमाने की कोई भी घटना गुरुत्वाकर्षण तरंगें उत्पन्न करेगी. उन गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता चल सकता है या आने वाले प्रयोगों जैसे कि इंटरनेशनल पल्सर टाइमिंग एरे (IPTA) या स्क्वायर किलोमीटर एरे (SKA) द्वारा लगाया जा सकता है.’ इली और केसी की रिसर्च Physical Review D जर्नल में छपी है.
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