COVID-19 cases in India: भारत में कोरोना…ओमिक्रॉन के 4 सब-वैरिएंट मिले, इम्यूनिटी को दे सकते हैं चकमा, जानें कितने खतरनाक? – आज तक

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COVID-19 cases in India: भारत के कई हिस्सों में कोविड-19 के मामले फिर से बढ़ रहे हैं. भारत में पिछले एक हफ्ते में कोविड-19 के 752 नए केस रिपोर्ट किए गए हैं. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने सोमवार को कहा, ‘शहर में वर्तमान में प्रसारित होने वाले नए कोविड वैरिएंट केवल सामान्य वायरल बुखार जैसे हल्के लक्षण पैदा कर रहे हैं और इस समय चिंता का कोई कारण नहीं है. हमने अस्पतालों को सलाह दी है कि वे किसी भी स्थिति के लिए बिस्तर, ऑक्सीजन, आवश्यक दवाओं और उपकरणों के साथ तैयार रहें.’ 
हाल ही में हुई वृद्धि का कारण कोरोना का नया वैरिएंट JN.1 का उभरना बताया जा रहा था, जो कई राज्यों में पाया गया है. यह JN.1 ओमिक्रॉन वैरिएंट का सब-वैरिएंट है. लेकिन अब कुछ और वैरिएंट भी सामने आए हैं जिनके कारण मामले बढ़ रहे हैं. 
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया, ‘मामलों में वृद्धि के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए निगरानी चल रही है और सरकार आवश्यक तैयारी कर रही है. हमें जो चार वैरिएंट मिले हैं वे ओमिक्रॉन के सबवैरिएंट हैं. एलएफ.7, एक्सएफजी, जेएन.1 और एनबी. 1.8.1. लेकिन आगे की जानकारी के लिए और नमूनों की जांच की जा रही है. भारत में बीमारी का प्रकोप नियंत्रण में है और सरकार सतर्क है तथा आवश्यक तैयारियां कर रही है.’
‘सरकार ने नए टीके बनाने के लिए प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं. अगर भविष्य में कोई नया वैरिएंट सामने आता है तो सरकार के पास 2 ऑपशंस हैं. मौजूदा टीकों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें और नए वैरिएंट को टारगेट करके एक नई वैक्सीन बनाएं.’
तो आइए जानते हैं भारत में अभी कौन-कौन से वैरिएंट मौजूद हैं.

जेएन.1 (JN.1)
दक्षिण-पूर्व एशिया में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि मुख्य रूप से JN.1 वैरिएंट के कारण हुई है जो कि ओमिक्रॉन BA.2.86 वैरिएंट का वंशज है. WHO के अनुसार, JN.1 वैरिएंट में लगभग 30 म्यूटेशन हैं और उनमें से LF.7 और NB.1.8 हैं जो हाल ही में रिपोर्ट किए गए मामलों में 2 सबसे कॉमन वैरिएंट हैं.
जनवरी 2024 के शुरुआत में भी जेएन.1 के केस भारत में भी मिले थे और अभी सिंगापुर-हांगकांग में उसी वैरिएंट के कारण मामले बढ़े हैं. हालांकि मुंबई के मामले कौन से वैरिएंट के हैं, इस बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आई है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बताया था कि जेएन.1, सब-वैरिएंट BA.2.86 में एक एक्स्ट्रा म्यूटेशन से बना है और यह काफी तेजी से फैलता है. इसलिए सभी को सावधान रहने की जरूरत है. जनवरी 2024 में दिल्ली में जेएन.1 सब-वैरिएंट का केस मिलने के बाद एम्स ने बताया था कि कौन से लक्षण वालों को बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी है और अगर ये लक्षण दिखे तो तुरंत जांच करानी चाहिए.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोविड-19 के अलग-अलग वैरिएंट के कारण उसके लक्षणों में बदलाव दिख सकते हैं क्योंकि भारत के लोगों को वैक्सीन की डोज लग चुकी हैं. 
कई लोगों को बूस्टर डोज भी लग चुकी है. हर बॉडी और उसकी इम्यूनिटी के आधार पर लोगों में अलग-अलग लक्षण नजर आ सकते हैं. सीडीसी ने 8 दिसंबर 2023 को जेएन.1 स्ट्रेन पर चर्चा करते हुए एक रिपोर्ट में कहा था, ‘जेएन.1 के लक्षण कितने गंभीर पर हैं, यह बात व्यक्ति की इम्यूनिटी और ओवरऑल हेल्थ पर डिपेंड करती है.’
यूके के हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोविड के जेएन.1 सब-वैरिएंट से संक्रमित लोगों ने कुछ संकेत बताए हैं, जिनमें शामिल हैं:
यूके के डॉक्टर्स के मुताबिक, ‘खांसी, गले में खराश, छींक आना, थकान और सिरदर्द सबसे अधिक बताए गए लक्षणों में से एक है लेकिन ये इंफ्लूएंजा के लक्षण भी हो सकते हैं इसलिए पहले टेस्ट कराएं.’

एनबी.1.8.1 (NB.1.8.1)
एशिया के कुछ क्षेत्रों में, NB.1.8.1 को कोविड-19 मामलों में वृद्धि से जोड़ा गया है. एनबी.1.8.1 के मामले में, यह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फैलने के संकेत दे रहा है, और कुछ विशिष्ट लक्षण भी सामने आ रहे हैं, लेकिन अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है. इस वैरिएंट ने अभी तक कोई खास खतरनाक काम नहीं किया है, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारी इस पर नज़र रख रहे हैं. 
NB.1.8.1 में A435S, V445H और T478I नाम के स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन हैं जो इसकी संक्रामकता और इम्यूनिटी से बचने की क्षमता दोनों को बढ़ा सकते हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि, जबकि NB.1.8.1 में मानव कोशिकाओं से जुड़ने की अधिक क्षमता है जो इसे और भी अधिक संक्रामक बना देता है. वर्तमान में यह सुझाव देने के लिए कोई सबूत नहीं है कि यह अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है या अन्य वैरिएंट की तुलना में इम्यूनिटी से बचने में बेहतर है. इस वैरिएंट पर नजर रखी जा रही है, इसका मतलब यह नहीं है कि यह खतरनाक है. 
NB.1.8.1 से संक्रमित लोगों ने अन्य ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट के समान लक्षण बताए हैं। इनमें शामिल हैं: लगातार खांसी, गला खराब होना, थकान, सिरदर्द, भूख में कमी, आंत संबंधी समस्याएं, धुंधली दृष्टि, मतली या चक्कर आना. एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वैरिएंट के साथ रिपोर्ट किया गया एक लक्षण लगातार कम-ग्रेड हाइपरथर्मिया (बुखार नहीं) है. एक सामान्य बुखार के विपरीत, हाइपरथर्मिया में शरीर के सेट पॉइंट में बदलाव के बिना शरीर का तापमान बढ़ जाता है. इसका मतलब है कि शरीर सामान्य से अधिक गर्म महसूस करता है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह बुखार के रूप में दर्ज हो.
एलएफ.7 (LF.7) 
एलएफ.7, जेएन.1 वैरिएंट का सब-लीनेज है जो भारत में सबसे प्रभावी स्ट्रेन बना हुआ है जो सभी सीक्वेंस सैंपलिंग का 53 प्रतिशत है. इस सब-वैरिएंट की निगरानी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा ‘निगरानी के अंतर्गत वैरिएंट’ के रूप में की जा रही है जिसका अर्थ है कि इनमें ऐसे म्यूटेशन हैं जो वायरस के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अभी तक ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ या ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है.
प्रारंभिक चरणों में किए गए अध्ययनों और विशेषज्ञों के आकलन से पता चलता है कि ये सब-वैरिएंट अधिक संक्रामक हैं और इनमें पहले के वैरिएंट की तुलना में इम्यूनिटी को चकमा देने की अधिक क्षमता है.
एक्सएफजी (XFG)
एक्सएफजी वैरिएंट के बारे में जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि इसे भी ओमिक्रॉन का सब-वैरिएंट ही बताया जा रहा है. यह कितना संक्रामक है, यह जानकारी सामने आने के बाद ही बताया जाएगा.

विशेषज्ञों ने कहा कि सभी ओमिक्रॉन वैरिएंट हैं और अब तक पूरे भारत में वृद्धि कम है और मृत्यु दर भी कम है. इन वैरिएंट से जुड़ा कोई बड़ा खतरा नहीं है. इस महीने डबल सीजन (गर्मी) की वजह से मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण बढ़ गए हैं. कोविड के लक्षण भी इससे अलग नहीं हैं. कोविड अब स्थानिक हो गया है और रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या में वृद्धि या कमी से चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं है.

भारत को कितना जोखिम?
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. सुरनजीत चटर्जी ने बताया, “फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है. हालांकि भारत में अभी तक नए वैरिएंट-विशिष्ट टीके उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी मौजूदा बूस्टर मजबूत सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं.’
कोलकाता के सीएमआरआई अस्पताल के कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अरूप हलदर ने कहा, ‘अधिकांश मामले हल्के हैं और अस्पताल में भर्ती होने की दर कम है. मामलों में वृद्धि मुख्य रूप से कमजोर इम्यूनिटी, असमान बूस्टर कवरेज और बेहतर निगरानी के कारण अवेयरनेस और के कारण है. यह जरूरी है कि अधिक जोखिम वाले व्यक्तियों को तुरंत टीका लगाया जाए, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना जारी रखा जाए और बुनियादी स्वच्छता प्रथाओं का पालन किया जाए’
विशेषज्ञों की सलाह है कि बुजुर्गों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों सहित उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों को शीघ्र ही बूस्टर खुराक लेनी चाहिए.
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