S और L की जगह बदलकर दे रहे थे धोखा… Bisleri को बिलसेरी लिखकर भर रहे थे पानी, हो गया तगड़ा एक्शन – आज तक

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क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बोतलबंद पानी को आप ब्रांडेड समझकर आंख बंदकर विश्वास करते हैं वह असल में नकली भी  हो सकती है. आपकी थोड़ी सी लापरवाही के चलते आपको नकली ब्रांड की बोतल दी जा सकती है. कुछ ऐसा ही फर्जीवाड़ा ग्रेटर नोएडा के कासना इंडस्ट्रियल एरिया में सामने आया है. यहां बिना लाइसेंस के चल रही दो फैक्ट्रियों में ‘बिसलेरी’ जैसी दिखने वाली बोतलों में पानी भरकर उन्हें बिलसेरी और ब्लेसरी के नाम से पैक कर बाजार में बेचा जा रहा था.
खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है. विभाग ने ग्रेटर नोएडा के कासना औद्योगिक क्षेत्र में दो अवैध फैक्ट्रियों पर छापा मारकर करीब 13 हजार से ज्यादा नकली बोतलें बरामद की हैं. दोनों प्लांट्स बिना किसी लाइसेंस और स्वच्छता मानकों के चल रहे थे.
कैसे किया जा रहा था नाम का खेल
बिसलेरी पानी की बोतल का असली और प्रसिद्ध ब्रांड है, जिसकी देशभर में पहचान है. इसकी अंग्रेजी स्पेलिंग है: BISLERI. इसी नाम से मिलती-जुलती नकली ब्रांड्स बनाई गईं. बिलसेरी (B-I-L-S-E-R-I) इसमें ‘S’ और ‘L’ की जगह बदल दी गई. इसी तरह Bleseri इसमें भी अक्षरों का फेरबदल कर ऐसा नाम रखा गया जो पढ़ने और सुनने में असली जैसा लगे. अधिकारियों का कहना है कि लोग अक्सर खरीदते समय सिर्फ बोतल का रंग और डिजाइन देखते हैं. ऐसे में जब नकली बोतल Bisleri जैसी दिखे, तो धोखा हो जाना लाजमी है.
क्या है पूरा मामला
खाद्य सुरक्षा विभाग को कुछ दिनों से शिकायतें मिल रही थीं कि ग्रेटर नोएडा के कुछ इलाकों में ऐसे प्लांट्स चल रहे हैं, जहां बिना लाइसेंस और नियमों के पानी को बोतलों में भरकर बाजार में बेचा जा रहा है. विभाग की टीम ने कासना स्थित साइट-5 के दो अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की.
पहला प्लांट गुप्ता इंटरप्राइजेज नाम से K-300, साइट-5 में चल रहा था. यहां 1 लीटर की बोतलों में Bilseri नाम से पानी पैक किया जा रहा था. यह नाम सुनने और देखने में Bisleri जैसा ही लगता है, जिससे आम ग्राहक भ्रमित हो जाए. दूसरा प्लांट पैरामेट्रो वॉसर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम से A-2/88, साइट-5 में चल रहा था. यहां भी 1 लीटर की बोतलों में Bleseri नाम से पानी भरा जा रहा था. इस ब्रांड का नाम भी Bisleri से काफी मिलता-जुलता है.
सहायक आयुक्त (खाद्य) सर्वेश कुमार ने बताया कि गुप्ता इंटरप्राइजेज से – 6252 बोतलें और पैरामेट्रो वॉसर टेक्नोलॉजी से  6856 बोतलें जब्त की गई हैं. इन सभी बोतलों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी.
दोनों फैक्ट्रियों के पास नहीं थे वैध कागजात
जांच के दौरान दोनों जगहों पर कोई भी वैध लाइसेंस, BIS सर्टिफिकेट या हाइजीन से जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं पाया गया. न तो पानी की क्वालिटी जांचने की सुविधा थी और न ही फिल्टरिंग का सही इंतजाम.
सहायक आयुक्त खाद्य सर्वेश कुमार ने बताया इन प्लांट्स की सूचना मिलने के बाद हमारी टीम मौके पर पहुंची. दोनों जगह पर अवैध रूप से पानी की पैकिंग हो रही थी. नाम के जरिए उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा था. हमने मौके पर मौजूद सारा स्टॉक सीज कर लिया है. जांच रिपोर्ट के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. 
कहां भेजा जा रहे थे ये नकली बोतलें
फैक्ट्रियों में तैयार ये नकली बोतलें दिल्ली-एनसीआर के छोटे दुकानदारों और बाजारों में सप्लाई की जा रही थीं. खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों, बस स्टैंड, स्टेशन और चाय नाश्ते की दुकानों पर इन्हें रखा जाता था. सहायक आयुक्त खाद्य सर्वेश कुमार का कहना है कि इन जगहों पर लोग आमतौर पर ब्रांड का नाम ध्यान से नहीं पढ़ते, बस बोतल की शक्ल देखकर खरीद लेते हैं. इसी का फायदा उठाकर ये प्लांट्स बड़ी संख्या में नकली पानी बेचने में जुटे थे.
क्या है खतरा
इस तरह के नकली पानी में ना तो शुद्धता होती है, ना ही स्वास्थ्य मानकों का कोई ख्याल रखा जाता है. ऐसे पानी को पीने से लोगों को पेट से जुड़ी बीमारियां, संक्रमण, उल्टी-दस्त और गंभीर स्थिति में किडनी व लिवर की समस्या तक हो सकती है.
कैसे बचें इस धोखे से
– बोतल का नाम ध्यान से पढ़ें. सिर्फ पैकिंग या कलर देखकर न खरीदें.
– QR कोड या BIS मार्क जरूर जांचें.
– संदिग्ध बोतल मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें.
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